
Biranpur Case: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर गाँव में 8 अप्रैल 2023 को हुई सांप्रदायिक हिंसा मामले में सुनवाई की प्रक्रिया ढाई साल बाद फिर तेज हो गई है। बुधवार को स्पेशल कोर्ट में हुई सुनवाई में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक नया आवेदन दायर किया। सीबीआई ने अदालत से आरोपियों पर लगाई गई धाराओं को और गंभीर अपराधों में बदलने की मांग की है। एजेंसी ने तर्क दिया है कि जांच के दौरान छह नए आरोपियों के नाम सामने आए हैं, जिनसे घटना से जुड़े कई नए तथ्य और परिस्थितियाँ उजागर हुई हैं।
19 नवंबर को होगा अंतिम फैसला, लंबी चली बहस
सीबीआई के आवेदन पर स्पेशल कोर्ट में CBI और बचाव पक्ष के बीच लंबी बहस हुई। बचाव पक्ष के वकीलों ने सीबीआई के आवेदन का जोरदार विरोध करते हुए कहा कि धारा बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि एजेंसी की चार्जशीट में पहले ही सभी तथ्यों का उल्लेख किया जा चुका है। बचाव पक्ष ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में देरी पैदा करने वाला अनावश्यक कदम बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर 19 नवंबर 2025 को अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।
हिंसा में 3 लोगों की हत्या, आगजनी से मचा था बवाल
बिरनपुर हिंसा का सूत्रपात 8 अप्रैल 2023 को दो बच्चों के बीच हुई मामूली झड़प से हुआ था, जो बाद में सांप्रदायिक हिंसा में बदल गई। इस हिंसा के दौरान साजा विधायक ईश्वर साहू के पुत्र भुनेश्वर साहू (22 वर्ष) की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया और गाँव में आगजनी हुई, जिसमें मुस्लिम समुदाय के रहीम (55) और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) की भी हत्या कर दी गई। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए प्रशासन ने दो सप्ताह तक कर्फ्यू लगाया था।
CBI चार्जशीट में राजनीतिक साजिश से इनकार
सीबीआई ने 30 सितंबर 2025 को अपनी चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। एजेंसी ने साफ किया कि बिरनपुर हिंसा किसी राजनीतिक साजिश का परिणाम नहीं थी, जैसा कि विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा था। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि मृतक भुनेश्वर साहू के पिता द्वारा संदेह व्यक्त किए जाने के बावजूद, पूर्व विधायक अंजोर यदु का नाम इस मामले में नहीं पाया गया। जांच को मजबूत बनाने के लिए एजेंसी ने अप्रैल 2024 में दोबारा दौरा कर वैज्ञानिक जाँच और गवाहों से पूछताछ की थी, जिसके बाद छह नए आरोपी चिन्हित हुए।
विधायक ईश्वर साहू बोले- बेटे को न्याय दिलाने तक संघर्ष जारी
बिरनपुर हिंसा को छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे संवेदनशील और जटिल सांप्रदायिक घटनाओं में से एक माना जाता है। इस मामले ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब जब कोर्ट सीबीआई के आवेदन पर फैसला सुनाएगा, तो सबकी निगाहें 19 नवंबर के निर्णय पर टिकी हैं। साजा विधायक ईश्वर साहू ने कहा है कि वह अपने बेटे भुनेश्वर को न्याय दिलाने के लिए अंत तक संघर्ष करते रहेंगे, वहीं सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, जांच अब अंतिम चरण में है।



