
CG Teacher Reappointment: छत्तीसगढ़ के बेरोजगार बीएड शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने 2621 बर्खास्त सहायक शिक्षकों को दोबारा मौका देने का ऐलान किया है। अब ये शिक्षक “सहायक शिक्षक (विज्ञान प्रयोगशाला)” के पद पर नियुक्त किए जाएंगे। इसके लिए काउंसिलिंग की प्रक्रिया 17 जून से शुरू होगी।
कोर्ट से नौकरी गई, सरकार से उम्मीद मिली
CG B.Ed Teachers: इस पूरे विवाद की जड़ हाई कोर्ट के उस फैसले में है, जिसमें बीएड डिग्रीधारकों को प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने के लिए अयोग्य करार दिया गया था। डीएलएड डिप्लोमा धारकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए 2 अप्रैल 2024 को बिलासपुर हाई कोर्ट ने बीएड शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने का निर्देश दिया था। जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो वहां से भी हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहा और बीएड शिक्षकों की एसएलपी खारिज कर दी गई।
अब बनेगी नई राह – विज्ञान प्रयोगशाला में मिलेगा पद
राज्य सरकार ने इन शिक्षकों को पूरी तरह बाहर करने की बजाय एक वैकल्पिक रास्ता निकाला है। अब इन्हें सहायक शिक्षक (विज्ञान प्रयोगशाला) के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने तकनीकी सहयोग लेने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। चिप्स (CHiPS) को सॉफ्टवेयर बनाने का निर्देश दिया गया है ताकि काउंसिलिंग प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल तरीके से पूरी हो सके।
17 जून से काउंसिलिंग, सॉफ्टवेयर से होगा पदस्थापन
CG Teacher Counseling 2025: काउंसिलिंग के जरिए शिक्षकों की नई तैनाती तय की जाएगी। शिक्षकों को स्कूल चुनने का मौका मिलेगा और उसी सॉफ्टवेयर के जरिए डायरेक्ट पोस्टिंग ऑर्डर भी जारी होंगे। इस पूरे सिस्टम से प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और विवाद की गुंजाइश खत्म होगी।
शिक्षा और रोजगार – दोनों को मिलेगी मजबूती
छत्तीसगढ़ सरकार के इस फैसले को शिक्षा जगत में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। एक ओर जहां बेरोजगार बीएड शिक्षकों को नौकरी का नया अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ राज्य के स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई को भी मजबूती मिलेगी। विज्ञान प्रयोगशाला के लिए प्रशिक्षित सहायक शिक्षक मिलना, छात्रों के लिए भी फायदेमंद होगा।
बेरोजगारी के खिलाफ सरकार का एक ठोस कदम
2621 शिक्षकों की बहाली से राज्य सरकार ने यह भी संदेश दिया है कि वह योग्य बेरोजगारों के साथ खड़ी है। यह फैसला बताता है कि कानूनी पेच में फंसे शिक्षकों को सरकार ने निराश नहीं किया और उन्हें नए रोल में फिर से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया है।



