
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अंतिम दिन बालोद जिले से एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। अपनी ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद संजारी बालोद की पूर्व विधायक कुमारी बाई साहू को अपना धान बेचने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। शुक्रवार सुबह से ही वे अरमरीकला धान खरीदी केंद्र में ट्रैक्टरों के साथ डटी रहीं, लेकिन देर रात तक उनका धान नहीं तौला गया। पूर्व विधायक का यह धरना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा, क्योंकि प्रशासन की अव्यवस्था की मार इस बार आम किसान के साथ-साथ रसूखदार नेताओं पर भी पड़ी।
लिमिट खत्म होने का मिला हवाला
पूर्व विधायक कुमारी बाई ने बताया कि उनके पास कुल रकबा के हिसाब से 488 क्विंटल धान बेचने की पात्रता थी। इसमें से पहली बार में उन्होंने 220 क्विंटल धान बेच दिया था, लेकिन बाकी बचे 268 क्विंटल के लिए वे लगातार टोकन मांग रही थीं। समिति के कर्मचारियों ने ‘लिमिट कम’ होने का बहाना बनाकर उन्हें दूसरा टोकन जारी करने से साफ मना कर दिया। शुक्रवार को जब खरीदी का आखिरी दिन था, तो वे बिना टोकन के ही अपना धान लेकर केंद्र पहुंच गईं, जहां अधिकारियों ने उनकी उपज लेने से इनकार कर दिया।
केंद्र पर जमी रहीं कुमारी बाई साहू
समिति के इनकार के बाद पूर्व विधायक पीछे हटने के बजाय वहीं धरने पर बैठ गईं। उनका कहना था कि जब एक पूर्व जन प्रतिनिधि को अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो आम किसानों का क्या हाल होता होगा। वे देर रात तक केंद्र पर ही डटी रहीं और प्रशासन से अपना धान खरीदने की मांग करती रहीं। इस दौरान वहां मौजूद अन्य किसानों ने भी अपनी समस्याएं बताईं, जिन्हें पोर्टल बंद होने या टोकन न मिलने की वजह से बैरंग लौटना पड़ रहा था।
अव्यवस्था ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल
धान खरीदी के अंतिम दिन प्रदेश की कई समितियों में ऐसे ही हालात देखे गए। पोर्टल की धीमी रफ्तार और खरीदी की तय सीमा (लिमिट) खत्म होने की वजह से हजारों किसान अपना धान नहीं बेच पाए। पूर्व विधायक के इस विरोध प्रदर्शन ने सरकार की धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या शासन ऐसे बचे हुए किसानों के लिए खरीदी की तारीख आगे बढ़ाता है या पूर्व विधायक को अपनी ही सरकार के खिलाफ लड़ाई जारी रखनी पड़ेगी।



