
रायपुर: छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) घोटाले से जुड़े मामले में ACB (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) और EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) की टीमों ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार देर रात रायपुर, धमतरी और राजनांदगाँव समेत कई जिलों में खनन (माइनिंग) कारोबारियों, सप्लायर और ब्रोकर के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा गया। बताया जा रहा है कि यह रेड सरकारी विभागों में सप्लाई से संबंधित अनियमितताओं और कमीशन के लेन-देन को लेकर की जा रही है।

राजनांदगाँव में तीन स्थानों पर छापा
कार्रवाई के तहत 10 गाड़ियों में अधिकारियों की टीम राजनांदगाँव पहुँची। वहाँ एक साथ तीन स्थानों पर छापेमारी की गई, जिनमें शामिल हैं:
- भारत माता चौक स्थित राधा कृष्ण एजेंसी (अग्रवाल निवास)।
- सत्यम विहार स्थित नहाटा का घर।
- कामठी लाइन स्थित भंसाली का ठिकाना।
वहीं, रायपुर में पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इन्क्लेव में भी कार्रवाई चल रही है। EOW/ACB की टीमें शासकीय सप्लाई के दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। अधिकारियों ने अभी तक इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

क्या है DMF घोटाला और ED का दावा?
यह पूरी कार्रवाई डिस्ट्रिक मिनरल फंड (DMF) में हुए बड़े घोटाले से जुड़ी है, जिसमें पहले भी कई बड़े अधिकारी जेल जा चुके हैं।
DMF घोटाले का स्वरूप:
- EOW ने दर्ज किया केस: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, ED (प्रवर्तन निदेशालय) की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है।
- आर्थिक अनियमितता: केस के अनुसार, कोरबा के डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं और टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुँचाया गया।
- कमीशन का खेल: यह खुलासा हुआ है कि DMF के तहत हुए वर्क प्रोजेक्ट में कमीशन के लिए फंड खर्च के नियमों को बदला गया। संशोधित नियमों के सहारे अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को अप्रूव किया गया।
- कमीशन प्रतिशत: कोरबा में हुए ₹575 करोड़ से ज्यादा के स्कैम की जाँच में पता चला है कि कलेक्टर को 40%, सीईओ को 5%, एसडीओ को 3% और सब इंजीनियर को 2% तक कमीशन मिला। टेंडर का यह कमीशन 25% से 40% तक होता था।
- मनोज द्विवेदी की भूमिका: कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी पर आरोप है कि उसने निलंबित IAS रानू साहू और अन्य अधिकारियों से मिलीभगत की। मनोज ने अपने NGO उद्गम सेवा समिति के नाम पर कई ठेके हासिल किए और अधिकारियों को टेंडर की राशि का 42% तक कमीशन दिया।

कमीशन के लिए बदले गए थे नियम
घोटाले को अंजाम देने के लिए DMF फंड खर्च के नियमों को बदला गया था। कमीशन बढ़ाने के उद्देश्य से फंड खर्च के नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की कैटेगरी को जोड़ा गया था। इससे जरूरी डेवलपमेंट वर्क को दरकिनार कर अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई।
ED की कार्रवाई में बरामदगी
ED की जाँच में पता चला था कि रिश्वत के लिए दी गई रकम की एंट्री विक्रेताओं ने आवासीय (अकोमोडेशन) के रूप में की थी। पूर्व में हुई तलाशी अभियान के दौरान ₹76.50 लाख कैश बरामद किया गया था और ₹35 लाख जमा वाले 8 बैंक खाते सीज किए गए थे। साथ ही, फर्जी डमी फर्मों से संबंधित विभिन्न स्टाम्प और आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए गए थे।



