
धमतरी: गरियाबंद पुलिस ने नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गरियाबंद, धमतरी, नुआपाड़ा डिविजन में सक्रिय उदंती एरिया कमेटी के सात नक्सलियों ने शुक्रवार, 7 नवंबर को अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।
37 लाख रुपए के इनामी नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
आत्मसमर्पण करने वालों में एरिया कमांडर सुनील मिंज और सचिव एरिना लकड़ा शामिल हैं। दोनों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इनके साथ दो अन्य नक्सलियों पर 5-5 लाख और एक पर 1 लाख रुपए का इनाम था। इस तरह कुल 37 लाख रुपए के इनामी नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के नाम
आत्मसमर्पण करने वालों में सुनील उर्फ टंकार सिंह, एरिना टोप्पो, फोंडिया उर्फ तेली, युंजु उर्फ वफुली, नानू, मायलस और डकफर शामिल हैं। इनके पास से 1 एसएलआर, 3 इंसास राइफल और एक सिंगल शॉट गन बरामद की गई है।
लंबे समय से थे जंगलों में सक्रिय
जानकारी के अनुसार, ये सभी माओवादी लंबे समय से गरियाबंद, धमतरी और नुआपाड़ा जिलों के जंगलों में सक्रिय थे। ये कई बड़े नक्सली हमलों में भी शामिल रहे हैं। पुलिस की लगातार कार्रवाई और आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर इन्होंने हथियार डालने का निर्णय लिया।

पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा का बयान
गरियाबंद पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने बताया कि आत्मसमर्पण से पहले इन माओवादियों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से बातचीत की थी। उन्हें पूर्ण सुरक्षा और पुनर्वास की गारंटी दी गई थी। पुलिस टीम ने नक्सलियों को जंगल से सुरक्षित निकालकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाया और आगे की प्रक्रिया के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया।

आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सहायता
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सभी नक्सलियों को आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधा, आवास और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
उदंती एरिया कमेटी को लगा बड़ा झटका
पुलिस के अनुसार, इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण से उदंती एरिया कमेटी की गतिविधियों को गहरा झटका लगा है। अब क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क लगभग निष्क्रिय हो गया है, जिससे आम जनता में सुरक्षा की भावना और भरोसा बढ़ा है।
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