
CG School Admission 2025: छत्तीसगढ़ में नया शिक्षा सत्र 16 जून से शुरू होने वाला है, लेकिन स्कूलों में किताबों की कमी ने हड़कंप मचा दिया है। कुछ जिलों में जहां पुस्तकें पहुंची हैं, वहां वितरण नहीं हुआ है, जबकि अन्य जिलों में तो एक भी पुस्तक नहीं आई है। इस स्थिति में सवाल उठता है कि जब पुस्तकें ही नहीं हैं, तो पढ़ाई कैसे होगी, खासकर जब कई कक्षाओं के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है।
पुस्तक वितरण की स्थिति
कक्षा 1 से 8वीं तक की पुस्तकों की बात करें तो दंतेवाड़ा, दुर्ग, गरियाबंद, कांकेर, कवर्धा, नारायणपुर और सुकमा जैसे जिलों में अभी तक खाता नहीं खुला है। बलरामपुर में 4%, कोंडागांव में 5%, खैरागढ़ में 1% और मनेंद्रगढ़ चिरमिरी में 6% पुस्तकों का वितरण हुआ है। वहीं, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में सरकारी स्कूलों में शत प्रतिशत और रायपुर में 81% पुस्तकों का वितरण हो चुका है।
शिक्षक संघ की चिंताएं
शालाएं शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र दूबे ने कहा कि स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी जाए और स्कूल खुलने से पहले किताबें उपलब्ध कराई जाएं। प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के अध्यक्ष राजेश चैटर्जी ने भी चेताया कि कई स्कूलों में पुस्तक सप्लाई अब तक नहीं हुई है, जिससे बच्चों को शिक्षा सत्र शुरू होने पर भी किताबों का इंतज़ार करना पड़ सकता है।
प्राइवेट स्कूलों की स्थिति
प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने तंज कसते हुए कहा कि 16 जून को स्कूल प्रवेशोत्सव है। क्या हम बच्चों को खाली हाथ वापस भेज दें? उन्होंने बताया कि स्कूल खुलने से पहले किताबें स्कूलों तक पहुंचाने का प्रावधान है, लेकिन इस बार व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। प्रदेश के 8 हजार निजी स्कूलों में से 6 हजार इंग्लिश मीडियम हैं, जहां हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में 12 लाख से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ते हैं।
अशासकीय स्कूल संघ की मांग
अशासकीय स्कूल संघ ने किताबों की कमी को देखते हुए स्कूल खोलने की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग की है। संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
पाठ्यपुस्तक निगम का दावा
पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पांडेय का कहना है कि किताबों की छपाई और वितरण का काम तेजी से चल रहा है। उनका दावा है कि 80% प्रिंटिंग हो चुकी है और अगले दो-तीन दिनों में बाकी 20% भी पूरा हो जाएगा।
प्रदेश में लगभग 46 हजार स्कूल हैं, जहां 56 लाख से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ते हैं। इस बार की देरी ने अभिभावकों और शिक्षकों को चिंता में डाल दिया है। बच्चे पढ़ेंगे कैसे और शिक्षक पढ़ाई कैसे कराएंगे, क्योंकि पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है।
लापरवाही और भ्रष्टाचार की कहानी
यह पहली बार नहीं है जब किताबों को लेकर विवाद हुआ हो। पिछले साल रायपुर में सरकारी किताबें रद्दी में बिकने की खबर ने सनसनी मचा दी थी। तब मुख्यमंत्री ने पाठ्यपुस्तक निगम के महाप्रबंधक को निलंबित किया था। अब एक बार फिर किताबों की कमी ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जैसे-जैसे स्कूल खुलने की तारीख नजदीक आ रही है, शिक्षा विभाग और पाठ्यपुस्तक निगम पर दबाव बढ़ रहा है। क्या समय रहते किताबें स्कूलों तक पहुंच पाएंगी या नया सत्र बिना किताबों के शुरू होगा? यह सवाल हर अभिभावक और शिक्षक के मन में है। फिलहाल, सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।



