पूर्व CM भूपेश बघेल के करीबी तांत्रिक का बड़ा खुलासा: हवाला से ऑस्ट्रेलिया-चीन में निवेश, खातों में मिला 441 करोड़ का लेन-देन…

पूर्व कांग्रेस सरकार में अपनी जबरदस्त पैठ का इस्तेमाल कर ठेका दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले कथित तांत्रिक कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके के खिलाफ पेश चार्जशीट में तेलीबांधा पुलिस ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं। बिलासपुर निवासी केके श्रीवास्तव ने नोएडा की रावत एसोसिएट कंपनी के मालिक अर्जुन सिंह को स्मार्ट सिटी के तहत 500 करोड़ रुपये के ठेके दिलाने का झांसा दिया और उनसे 15 करोड़ रुपये वसूल लिए। पुलिस के अनुसार, केके और उसका बेटा कंचन पिछली सरकार में कई बड़े नेताओं से जुड़ा होने के कारण अत्यंत प्रभावशाली थे।

खातों में 441 करोड़ का लेन-देन और हवाला कनेक्शन

पुलिस ने दावा किया है कि केके और कंचन के बैंक खातों की जाँच में 441 करोड़ रुपये के बड़े लेन-देन का रिकॉर्ड मिला है। पुलिस का कहना है कि दोनों ने इस पैसे को हवाला के जरिए ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देशों में भेजकर निवेश किया। अर्जुन सिंह ने ठेका मिलने की उम्मीद में 10 से 17 जुलाई 2023 के बीच कंचन और केके को 15 करोड़ रुपये की रकम पाँच अलग-अलग खातों में भेजी थी, जिनमें से तीन खाते केके के लिए काम करने वाले अब्बास अली के नाम पर थे।

कार से भागे, दिल्ली में छिपे रहे तांत्रिक पिता-पुत्र

केके और कंचन दोनों फरार हो गए थे। पुलिस की जाँच में पता चला कि एक युवा कांग्रेसी नेता ने अपनी कार में केके को छिपाकर पहले नागपुर पहुँचाया। वहाँ कुछ दिन रहने के बाद दोनों दिल्ली गए, जहाँ वे लगभग एक महीने तक छिपे रहे। लंबी तलाशी के बाद, पुलिस ने 24 जून को केके श्रीवास्तव को भोपाल से गिरफ्तार किया। वहीं, पुलिस ने कंचन को फरार बताया है, जबकि कंचन को रायपुर और बिलासपुर में देखे जाने की खबरें हैं।

CBI और ED करेंगी जाँच

पुलिस द्वारा पेश की गई चार्जशीट में इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और महादेव सट्टा ऐप से संबंध का भी उल्लेख किया गया है। यह रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भेजी गई है।

  • ED: एजेंसी ने पहले ही जाँच शुरू कर दी है, क्योंकि यह मामला हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
  • CBI: महादेव सट्टा मामले की जाँच कर रही सीबीआई भी जल्द ही केके श्रीवास्तव से पूछताछ करेगी।

सूत्रों के अनुसार, सीबीआई दिसंबर में महादेव सट्टा मामले में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

फर्जी दस्तावेज और विश्वासघात

अर्जुन सिंह को झांसा देने के लिए पिता-पुत्र लगातार उनसे संपर्क में थे और उन्हें व्हाट्सएप पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े फर्जी दस्तावेज भेजते थे, जिससे अर्जुन को ठेका मिलने का पूरा भरोसा हो गया था। पैसे ट्रांसफर होने के बाद, कुछ रकम लौटाने के बावजूद, बाकी पैसा वापस नहीं किया गया और दोनों ने इसे अपने निजी उपयोग में खर्च कर दिया। यह मामला दिखाता है कि कैसे उच्च राजनीतिक पहुँच का लाभ उठाकर बड़े स्तर पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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