
रायपुर: Smart City Project in Raipur: राजधानी रायपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हुए करोड़ों के काम अब खुद अपनी हालत बयान कर रहे हैं। चौबे कॉलोनी के पास स्थित करबला तालाब इसका ताज़ा उदाहरण बन गया है। जहां सौंदर्यीकरण के नाम पर खर्च तो हुआ डेढ़ करोड़ रुपये, लेकिन कुछ सालों में ही पाथवे धंस गया और बाउंड्रीवाल तालाब में गिरने लगी है।
स्मार्ट सिटी का सौंदर्यीकरण, अब बना बदसूरती का सबूत
करीब 4-5 साल पहले रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम ने मिलकर करबला तालाब को सजाने-संवारने का बीड़ा उठाया था। तालाब का गहरीकरण हुआ, बीच में टापू बनाया गया और चारों ओर पेवर ब्लॉक से पाथवे तैयार किया गया। साथ ही बाउंड्रीवाल भी बनाई गई थी।

लेकिन अब हालात यह हैं कि बाउंड्रीवाल धंसकर तालाब में गिर रही है और पाथवे जगह-जगह से टूट चुका है। इस निर्माण में न तो कॉलम डाला गया, न ही बीम, जिसके चलते दीवार अपनी नींव पर टिकी ही नहीं रह पाई।
स्थानीय लोगों की चिंता – बच्चों को नहीं लाते अब यहां
तालाब के पास रहने वाले संतोष कुमार यादव ने बताया कि जब से पाथवे धंसा है, तब से उन्होंने अपने बच्चों को तालाब किनारे ले जाना ही बंद कर दिया है। उनका कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता बेहद घटिया रही है और प्रशासन को इसे जल्द दुरुस्त करना चाहिए।
विधायक मूणत ने किया था निरीक्षण, फिर से होगा 2 करोड़ का खर्च
इस मामले में कुछ समय पहले रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत ने करबला तालाब का निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि तालाब को कब्जामुक्त किया जाए और फिर से सौंदर्यीकरण किया जाए। अब निगम इस तालाब की हालत सुधारने के लिए करीब 2 करोड़ रुपये और खर्च करने जा रहा है।

मूणत ने खासतौर पर पाथवे और बाउंड्रीवाल की मज़बूती पर ज़ोर देते हुए कहा था कि इस बार बेस को मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में ये फिर न धंसे।
जनता का सवाल – स्मार्ट सिटी में ‘स्मार्टनेस’ कहां है?
करबला तालाब की यह हालत लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में गुणवत्ता और ज़िम्मेदारी का ध्यान क्यों नहीं रखा गया?



