
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सात साल बाद जमीन की खरीद-बिक्री की गाइडलाइन दरों में की गई भारी बढ़ोतरी का रियल एस्टेट कारोबारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। कारोबारियों ने स्पष्ट ऐलान किया है कि जब तक बढ़ी हुई दरों में संशोधन नहीं होता, वे रजिस्ट्री नहीं कराएँगे। शहरों में जहाँ 20 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह बढ़ोतरी 50 से 300 फीसदी तक दर्ज की गई है।
विरोध की वजह: 300 फीसदी तक बढ़ गई हैं दरें
संपत्ति की नई गाइडलाइन दरें जारी होने के बाद से रियल एस्टेट कारोबारियों में गहरी नाराजगी है। कारोबारियों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से रियल एस्टेट का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होगा। विशेषकर रायपुर और आसपास के इलाकों में गाइडलाइन दर 300 फीसदी तक बढ़ गई है। इस भारी वृद्धि से निवेशकों और खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
बढ़ोतरी से बड़े प्रोजेक्ट्स में नुकसान की आशंका
रायपुर और आसपास के इलाकों में इन दिनों बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है और हजारों करोड़ का निवेश भी हो रहा है। कारोबारियों को डर है कि गाइडलाइन दरों में हुई इस भारी वृद्धि से उनके चल रहे प्रोजेक्ट्स को नुकसान हो सकता है। बढ़ी हुई दरों के कारण संपत्ति की कुल लागत में अभूतपूर्व वृद्धि हो जाएगी, जिससे बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
कारोबारी हुए लामबंद, रणनीति तय करने के लिए बैठक
गाइडलाइन दरों के विरोध के लिए रियल एस्टेट कारोबारी अब लामबंद हो रहे हैं। विरोध को लेकर आगे की रणनीति तय करने के लिए रविवार को एक बड़ी बैठक रखी गई है। कारोबारियों की लगातार बैठकें चल रही हैं और उन्होंने चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री से भी समर्थन मांगा है। विरोध को प्रभावी बनाने के लिए फिलहाल रजिस्ट्री नहीं कराने का फैसला लिया गया है।
मांग: दरें संशोधित होने तक ‘काम बंद’
रियल एस्टेट कारोबारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार गाइडलाइन दरों में संशोधन नहीं करती। उनका मुख्य उद्देश्य दरों को व्यवसायिक रूप से व्यवहार्य स्तर पर लाना है ताकि रियल एस्टेट सेक्टर का कारोबार प्रभावित न हो। एक-दो दिनों में बड़ी बैठक के बाद विरोध की विस्तृत रूपरेखा सामने आने की संभावना है।



