
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन नशे के बढ़ते कारोबार पर जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सदन में चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि प्रदेश में ड्रग्स और गांजे का इस्तेमाल खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे विफल बताया। दूसरी ओर, गृह मंत्री विजय शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठी है और नशा माफियाओं की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए पहली बार कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
प्रदेश में नशेडि़यों की संख्या पर अजय चंद्राकर का बड़ा दावा
विधायक अजय चंद्राकर ने एम्स (AIIMS) और सामाजिक न्याय मंत्रालय के सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में करीब 2 लाख लोग ड्रग्स के आदी हो चुके हैं। वहीं, गांजा पीने वालों की संख्या लगभग 4 लाख तक पहुँच गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 10 से 17 साल की उम्र के लगभग 40 हजार बच्चे कफ सिरप और इनहेलेंट जैसे नशे की चपेट में हैं। चंद्राकर ने कहा कि नशे की लत के कारण युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं और पिछले कुछ समय में ऐसे 300 के करीब मामले सामने आए हैं।
गृह मंत्री का पलटवार: माफियाओं की संपत्ति होगी राजसात
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार अब केवल आरोपियों को जेल भेजने तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि इस साल जनवरी तक 146 मामले दर्ज कर 257 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बड़ी कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 16 बड़े नशा तस्करों की लगभग 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति को फ्रीज या अटैच किया गया है। सरकार ‘सेफेमा’ (SAFEMA) कोर्ट के जरिए अपराधियों की आर्थिक शक्ति को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है।
एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स का गठन और नई रणनीति
नशे के खिलाफ जंग को तेज करने के लिए सरकार ने प्रदेश में ‘एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स’ बनाई है। मंत्री ने बताया कि इसके लिए 100 पद स्वीकृत किए गए हैं और पुलिस विभाग के ही अनुभवी जवानों को इसमें शामिल किया जा रहा है। रायपुर, बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा जैसे संभागों में यह टास्क फोर्स विशेष रूप से सक्रिय है। पुलिस अब केवल ‘एंड यूजर’ को नहीं पकड़ रही, बल्कि नशे की सप्लाई चेन के आखिरी छोर तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।
स्कूलों के पास बिक रहा नशा, विधायकों ने जताई चिंता
सदन में चर्चा के दौरान विधायक कुंवर सिंह निषाद और राजेश मूणत ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास नशे की बढ़ती उपलब्धता पर गहरी चिंता व्यक्त की। मूणत ने सुझाव दिया कि राजधानी में सूखा नशा बेचने वालों की सूचना देने वालों के लिए इनाम की घोषणा की जानी चाहिए। विधायकों का कहना था कि छोटे किराना स्टोर और पान ठेलों के जरिए बच्चों तक नशीली चीजें पहुँच रही हैं, जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
शराब के मुद्दे पर सदन में छिड़ी जुबानी जंग
जब नशे पर बहस चल रही थी, तब शराब का मुद्दा भी उठा। गृह मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि “शराब पर बात निकली तो दूर तलक जाएगी।” इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तुरंत जवाब दिया कि “बात दूर तक जाती है तो जाने दीजिए, सत्र चल रहा है और इस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।” इस जुबानी जंग ने सदन के माहौल को और भी गर्मा दिया, जिससे स्पष्ट हुआ कि नशा प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बन चुका है।
विभागों के बीच तालमेल की कमी पर सवाल
अजय चंद्राकर ने कहा कि गृह विभाग केवल गिरफ्तारियों के आंकड़े गिनाता है, लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका क्या है, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या विभिन्न विभागों के बीच कोई समन्वय है? जवाब में गृह मंत्री ने बताया कि ‘नार्कोटिक्स को-ऑर्डिनेशन’ की नियमित बैठकें ली जा रही हैं। इसमें पुलिस के साथ-साथ स्वास्थ्य और आबकारी विभाग को भी शामिल किया गया है ताकि नशे के खिलाफ एक संयुक्त अभियान चलाया जा सके।
जनजागरूकता और समाज को बचाने की चुनौती
बहस के अंत में यह बात निकलकर आई कि केवल कानूनी कार्रवाई से नशे को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता। अजय चंद्राकर ने कहा कि सरकार को जेल भरने के बजाय समाज को बचाने पर ध्यान देना चाहिए। गृह मंत्री ने भी सहमति जताते हुए कहा कि नशे का आदी व्यक्ति पीड़ित होता है, जबकि उसका व्यापार करने वाला असली अपराधी। सरकार नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान और नशामुक्ति केंद्रों को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।



