
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कोमल जंघेल पूर्व विधायक और भाजपा के कद्दावर नेता के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायतकर्ता महिला भी उसी पार्टी की सक्रिय नेत्री है। छुईखदान थाने में लिखित शिकायत दर्ज होने के बाद से ही पूरे जिले सहित प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे प्राथमिकता पर लिया है।
पहचान गोपनीय रखने के लिए नेत्री ने की अपील
शिकायत दर्ज कराने वाली भाजपा महिला नेत्री ने पुलिस प्रशासन को एक अलग से आवेदन सौंपकर अपनी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का विशेष अनुरोध किया है। नेत्री का कहना है कि आरोपी एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व है, ऐसे में नाम उजागर होने पर उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर खतरा हो सकता है। पुलिस ने भी कानून के प्रावधानों का सम्मान करते हुए उनकी पहचान सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया है।
आईजी कार्यालय सीधे कर रहा है मॉनिटरिंग
आरोपी की हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हैसियत को देखते हुए इस पूरे मामले की कमान उच्च अधिकारियों ने संभाल ली है। पुलिस महानिरीक्षक (IG) कार्यालय सीधे तौर पर जांच की प्रगति की निगरानी कर रहा है। मामले में किसी भी तरह की तकनीकी या कानूनी चूक न हो, इसके लिए आईजी कार्यालय से मिले दिशा-निर्देशों के आधार पर ही साक्ष्यों का संकलन किया जा रहा है। पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और संबंधित पक्षों के बयानों को जुटाने में लग गई है।
दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल बयानों के आधार पर ही नहीं, बल्कि दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्यों को भी मजबूती से इकट्ठा किया जा रहा है। इसमें मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स, चैट और अन्य डिजिटल फॉरेंसिक पहलुओं को शामिल किया गया है। कानून के जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशासन ने कहा: निष्पक्ष रहेगी पूरी जांच प्रक्रिया
राजनीतिक रसूख के बीच जांच प्रभावित होने की आशंकाओं को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि जांच की प्रक्रिया को हर तरह के बाहरी दबाव और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखा जाएगा। पुलिस का कहना है कि कानून के सामने सभी नागरिक समान हैं और किसी भी आरोपी को उसके पद या कद के कारण विशेष रियायत नहीं दी जाएगी। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।
अफवाहों से बचने के लिए पुलिस की अपील
मामले के तूल पकड़ने के बाद खैरागढ़ और आसपास के क्षेत्रों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इसे देखते हुए पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रशासन ने कहा है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और किसी भी आधिकारिक जानकारी के बिना निष्कर्ष निकालना जांच को प्रभावित कर सकता है।
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