
Political Party Registration Cancelled: भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर के 334 राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। इसमें मध्यप्रदेश के 15 और छत्तीसगढ़ के 9 दल शामिल हैं। आयोग की ओर से यह कदम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत उठाया गया है, जिसमें यह प्रावधान है कि अगर कोई पार्टी लगातार 6 साल तक किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेती, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।
मध्यप्रदेश के 15 राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द
मध्यप्रदेश के जिन 15 दलों को रजिस्ट्रेशन सूची से हटाया गया है, वे लंबे समय से निष्क्रिय थे और किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव में भाग नहीं ले रहे थे।
इन दलों के नाम इस प्रकार हैं:
| क्रमांक | राजनीतिक दल का नाम |
|---|---|
| 1 | भारतीय जनता भीम पार्टी |
| 2 | स्वर्ण समाज पार्टी |
| 3 | राष्ट्र वाहिनी पार्टी |
| 4 | लोकतांत्रित सरकार पार्टी |
| 5 | क्रांतिकारी किसान सेना |
| 6 | किसान मजदूर प्रज्ञा पार्टी |
| 7 | जन न्याय दल |
| 8 | जनता विकास पार्टी |
| 9 | जय मानवता पार्टी |
| 10 | गोंडवाना मुक्ति पार्टी |
| 11 | गोंडवाना कांग्रेस पार्टी |
| 12 | भारतीय सत्य संघर्ष पार्टी |
| 13 | भारतीय जन जागरूक पार्टी |
| 14 | भारतीय ग्रामीण समाज पार्टी |
| 15 | एक अन्य क्षेत्रीय दल |
छत्तीसगढ़ के 9 दलों का भी नाम सूची में
छत्तीसगढ़ के जिन 9 दलों का पंजीकरण रद्द किया गया है, वे भी बीते कई वर्षों से किसी चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय नहीं थे। आयोग ने इन दलों को पहले नोटिस भेजा था, लेकिन समय पर जवाब नहीं आने पर यह फैसला लिया गया।
(इन दलों के नाम संबंधित राज्य चुनाव आयोग की सूची से सार्वजनिक रूप से जारी किए गए हैं।)

अब देश में कितनी पार्टियां बचीं?
भारत निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अब देश में 6 राष्ट्रीय दल और 67 क्षेत्रीय मान्यता प्राप्त दल ही सक्रिय हैं। रद्द की गई पार्टियों को चुनाव चिन्ह, सरकारी सुविधाएं और वित्तीय लाभ नहीं मिलेंगे।
क्यों रद्द होता है पंजीकरण?
Political Party Registration Rules India: राजनैतिक दलों का पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत होता है। यदि कोई पार्टी 6 साल तक कोई चुनाव नहीं लड़ती, कोई संगठनात्मक गतिविधि नहीं दिखाती, या जरूरी जानकारी समय-समय पर आयोग को नहीं भेजती, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।
DKनिष्क्रिय दलों पर निगरानी और पारदर्शिता की पहल
India Election Reforms: चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को राजनीतिक पारदर्शिता बढ़ाने और निष्क्रिय दलों को हटाने की कवायद माना जा रहा है। इससे न केवल पंजीकृत दलों की संख्या में स्पष्टता आएगी, बल्कि फर्जी और कागजी दलों की गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।
Also Read: CG Mantrimandal Vistar: 15 अगस्त से पहले साय मंत्रिमंडल का विस्तार, तीन नाम लगभग तय



