कानून के रखवालों के बीच छिड़ी जंग: थाने के बाहर तहसीलदार बैठा धरने पर, जानें किस मामले को लेकर जताई नाराजगी

सारंगढ़ जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां न्याय दिलाने वाले प्रशासनिक अधिकारी को खुद इंसाफ के लिए सड़क पर उतरना पड़ा। कोरबा जिले के दीपका में पदस्थ तहसीलदार वंदे राम भगत सिटी कोतवाली थाने के बाहर अनशन पर बैठ गए हैं। उनका आरोप है कि 20 जनवरी को उनके बेटे राहुल भगत के साथ कलेक्टर के निजी सुरक्षा गार्ड (गनमैन) हरिश चंद्रा ने सरेआम बेरहमी से मारपीट की। बताया जा रहा है कि स्कूटी से जाते समय सड़क पर किसी मामूली ट्रैफिक विवाद को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई थी, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई।

शिकायत के बाद भी पुलिस की चुप्पी से बढ़ा विवाद

घटना के तुरंत बाद पीड़ित राहुल भगत ने कोतवाली थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। तहसीलदार का आरोप है कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आरोपी गनमैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है। रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं और पुलिस दबाव में आकर कार्रवाई से बच रही है। इसी पुलिसिया सुस्ती और पक्षपातपूर्ण रवैये से नाराज होकर तहसीलदार ने आमरण अनशन का रास्ता चुना है। उनका कहना है कि जब एक राजपत्रित अधिकारी के परिवार को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है, तो आम जनता का क्या हाल होता होगा।

थाने के सामने अनशन पर बैठे तहसीलदार

तहसीलदार वंदे राम भगत ने साफ कर दिया है कि जब तक आरोपी गनमैन पर मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका अनशन जारी रहेगा। सिटी कोतवाली परिसर के पास धरने पर बैठे तहसीलदार को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है। इस घटना ने जिले के प्रशासनिक और पुलिस महकमे के बीच के तनाव को सार्वजनिक कर दिया है। एक ही प्रशासन के दो अंगों के बीच चल रहे इस टकराव से शहर में सनसनी फैल गई है और पुलिस के आला अधिकारी अब बीच-बचाव की कोशिश में जुटे हैं।

प्रशासन और पुलिस के बीच बढ़ा तनाव

इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ कलेक्टर का सुरक्षा स्टाफ है और दूसरी तरफ तहसीलदार जैसा जिम्मेदार पद। पुलिस के लिए यह स्थिति “सांप-छछूंदर” जैसी हो गई है क्योंकि आरोपी सीधे तौर पर जिले के सबसे बड़े अधिकारी के करीब तैनात है। फिलहाल, उच्च अधिकारियों ने मामले की जांच का भरोसा दिया है, लेकिन तहसीलदार अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। इस विवाद ने सारंगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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