छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा कदम: ‘जशप्योर’ ब्रांड का ट्रेडमार्क अब उद्योग विभाग को सौंपने की तैयारी, वैश्विक पहचान की ओर बढ़ा आदिवासी महिलाओं का उद्यम

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के वोकल फॉर लोकल अभियान को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब जशपुर की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित प्राकृतिक वनोपज आधारित ब्रांड जशप्योर का ट्रेडमार्क उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य ब्रांड की उत्पादन क्षमता, ब्रांडिंग और विपणन को संस्थागत रूप देना है, जिससे यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान और मजबूत कर सके।

‘जशप्योर’ – परंपरा और उद्यमिता का संगम

जशप्योर एक ऐसा ब्रांड है जो जशपुर की आदिवासी महिलाओं के परंपरागत ज्ञान और आधुनिक उद्यमिता का प्रतीक है। यहां के उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक, रसायनमुक्त और पोषणयुक्त होते हैं। महुआ, मिलेट, ढेकी कूटा चावल और रागी जैसे वनोपजों से बने उत्पादों की देशभर में सराहना की जा रही है। जशप्योर की खासियत इसकी 90% महिला कार्यशक्ति है, जो न केवल उत्पाद निर्माण बल्कि पैकेजिंग और विपणन में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।

20 सितंबर 2024 को वर्ल्ड फूड इंडिया, नई दिल्ली में ‘जशप्योर’ के स्टॉल को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। स्वास्थ्यवर्धक और रसायनमुक्त उत्पादों ने पोषण विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। इसी तरह रेयर प्लेनेट के साथ हुए समझौते के तहत देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर जशप्योर के उत्पाद अब उपलब्ध होंगे, जिससे ब्रांड की पहुंच और अधिक व्यापक हो सकेगी।

लोकल टू ग्लोबल’ की दिशा में एक निर्णायक कदम

युवा वैज्ञानिक समर्थ जैन के मुताबिक, “महुआ अब सिर्फ शराब नहीं, बल्कि ग्रीन गोल्ड है।” इस सोच के साथ जशप्योर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयास तेज हो चुके हैं। उद्योग विभाग को ट्रेडमार्क ट्रांसफर होने से उन्नत मशीनों, प्रभावी मार्केटिंग और वैश्विक विस्तार की दिशा में जशप्योर को नई ताकत मिलेगी।

महिला सशक्तिकरण और आर्थिक उन्नति की मिसाल

यह निर्णय सिर्फ एक ब्रांड के लिए नहीं, बल्कि **सैकड़ों आदिवासी महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जशप्योर अब न केवल छत्तीसगढ़ की शान है, बल्कि यह भारत के ग्रामीण और पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने वाला एक प्रेरक मॉडल बन चुका है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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