VIDEO: खाकी की बदजुबानी: गृहमंत्री विजय शर्मा के बंगले पर फरियादियों का अपमान, सुरक्षाकर्मियों ने कहा- ‘मंत्री तुम्हारे बाप के नौकर नहीं’

छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा के सरकारी आवास के बाहर अपनी मांगों को लेकर पहुंचे सीएएफ (CAF) वेटिंग लिस्ट अभ्यर्थियों को खाकी के कड़े और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा। शांतिपूर्ण तरीके से मुलाकात का इंतजार कर रहे युवाओं का आरोप है कि वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। महिला अभ्यर्थियों ने रोते हुए बताया कि पुलिस अधिकारियों ने उनसे साफ लहजे में कहा कि मंत्री तुम्हारे बाप के नौकर नहीं हैं जो जब चाहोगे तब मिल लेंगे। अपनी जायज मांगों के लिए सालों से भटक रहे इन युवाओं के लिए यह व्यवहार किसी गहरे जख्म से कम नहीं था।

बीमार छात्रा को कंधे पर लादकर ले गए साथी

प्रदर्शन में शामिल चांदनी सोनवानी ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनकी हालत बिगड़ने पर भी प्रशासन का दिल नहीं पसीजा। मंगलवार को जब वह बीमार पड़ीं, तो न तो कोई एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और न ही किसी अधिकारी ने मदद की। उनके साथियों को उन्हें अपने कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब चुनाव आते हैं, तो यही नेता हाथ जोड़कर वोट मांगते हैं और हर समस्या दूर करने का वादा करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनके सुरक्षाकर्मी आम जनता को ‘सड़क छाप’ कहकर अपमानित करते हैं।

7 साल से वर्दी का सपना देख रहे युवा

ये अभ्यर्थी साल 2018 से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह भर्ती भाजपा के पिछले शासनकाल में निकली थी, जिसके बाद 5 साल कांग्रेस की सरकार रही और अब दोबारा भाजपा सत्ता में है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि राजपत्र के नियमों के अनुसार पद रिक्त हैं, फिर भी उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा रही है। वे केवल इतना चाहते हैं कि गृहमंत्री उनकी बात सुनें और कैबिनेट की बैठक में उनके भविष्य पर चर्चा करें। अभ्यर्थियों ने यहां तक कहा कि वे देश सेवा के लिए साल भर बिना वेतन के काम करने को भी तैयार हैं।

बस में भरकर धरना स्थल भेजने का आरोप

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे जब भी अपनी फरियाद लेकर आते हैं, पुलिस उन्हें जबरन बस में भरकर तूता धरना स्थल छोड़ आती है। सुनीता नारंग नाम की अभ्यर्थी ने बताया कि वे बिना किसी हंगामे के शांति से बैठे रहते हैं, फिर भी पुलिस उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करती है। पिछली बार तो पुलिस ने उन्हें नाश्ता भी पूरा नहीं करने दिया और बीच में ही उठाकर ले गई। मानवाधिकार आयोग न्याय सुरक्षा संगठन ने भी पुलिस के इस रवैये की कड़ी निंदा की है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।

मानवाधिकार संगठन ने उठाए सुरक्षा बलों पर सवाल

इस पूरे मामले में मानवाधिकार न्याय सुरक्षा संगठन की जिला अध्यक्ष समीक्षा त्रिपाठी ने कहा कि सुरक्षा बलों की बदजुबानी बर्दाश्त के बाहर है। वर्दी की चाहत रखने वाले इन युवाओं को सम्मान देने के बजाय उन्हें दुत्कारा जा रहा है। संगठन ने मांग की है कि सरकार को इन अभ्यर्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। वर्तमान में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक गृहमंत्री से सीधा संवाद नहीं होता, उनका प्रयास जारी रहेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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