
जगदलपुर: Naxalite Press Note: छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में दशकों से सशस्त्र संघर्ष के जरिए आतंक फैलाने वाला नक्सली संगठन अब खुद को दबाव में महसूस कर रहा है। लगातार हो रहे सुरक्षाबलों के अभियानों और बढ़ते आत्मसमर्पण के बीच अब माओवादी एक बार फिर शांति वार्ता के प्रस्ताव के साथ सामने आए हैं।
वायरल हुआ माओवादी प्रवक्ता का पत्र
Viral Naxalite Press Note: माओवादी केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता ‘अभय’ का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने सरकार से शांति वार्ता शुरू करने की अपील की है। यह पत्र 15 अगस्त को लिखा गया बताया जा रहा है, हालांकि यह कुछ दिनों बाद सार्वजनिक हुआ। पत्र में माओवादियों ने बिना किसी शर्त के बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही है।
युद्धविराम की रखी शर्त, सरकार को माहौल बनाने की सलाह
पत्र में यह भी उल्लेख है कि वार्ता शुरू होने से पहले एक महीने के लिए युद्धविराम की आवश्यकता है, जिससे संगठन के अन्य नेताओं और कैडर से संपर्क स्थापित कर आगे की रणनीति पर विचार किया जा सके। माओवादियों ने यह भी कहा है कि सरकार को चाहिए कि वह सैन्य अभियान और खोजी कार्रवाई को रोककर संवाद के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करे।
प्रवक्ता का दावा: संगठन के अधिकतर कैडर से संपर्क टूटा
अभय ने पत्र में यह भी लिखा है कि वर्तमान समय में संगठन के अधिकांश कैडर से संपर्क नहीं हो पा रहा है, ऐसे में कोई बड़ा निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने आंशिक युद्धविराम की वकालत करते हुए कहा कि यह शांति प्रक्रिया की दिशा में पहला कदम होगा।
झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा पर मारे गए बड़े नेता, बढ़ा दबाव
इस पत्र का सामने आना ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर माओवादी केंद्रीय कमेटी के दो शीर्ष नेताओं को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। इसके अलावा राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नक्सली संगठन से जुड़े लोग लगातार आत्मसमर्पण कर रहे हैं, जिससे संगठन की ताकत लगातार कमजोर होती जा रही है।
सरकार से संवाद के लिए फोन और ईमेल पर जवाब की प्रतीक्षा
पत्र में माओवादियों ने यह भी उल्लेख किया है कि वे अब सरकार से संवाद के लिए मोबाइल नंबर और ईमेल के माध्यम से जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह पहली बार है जब माओवादी इस तरह औपचारिक रूप से संवाद के लिए तकनीकी माध्यमों का उल्लेख कर रहे हैं।
गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग
अंत में माओवादियों ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय से अपील की है कि वह इस दिशा में पहल करते हुए शांति वार्ता की प्रक्रिया शुरू करवाए और एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का गठन कर वार्ता का मार्ग प्रशस्त करे।


हालांकि इस पत्र की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच में जुटी हैं और राज्य सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
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