
Megha Anicut: धमतरी जिले में मेघा एनीकट एक बार फिर हादसे का कारण बन गया। बुधवार को दो बाइक सवार एनीकट के तेज बहाव में फिसलकर पानी में जा गिरे। गनीमत रही कि नीचे मछली पकड़ रहे युवकों ने समय रहते स्कूटी सवार को बचा लिया, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। लोगों ने उनके बाइक एवं दोनों व्यक्तियों को सही सलामत नदी से निकल लिए इस घटना के बाद भी प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि एनीकट मार्ग पर सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लोग आये दिन महानदी के एनीकट से 1 किलोमीटर का सफर जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हैं।
एनीकट पर तेज बहाव, फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर कर रहे पार
Megha News: पिछले दो दिनों से मेघा एनीकट मार्ग को पानी कम होने के बाद खोला गया था, जिससे लोगों की आवाजाही फिर शुरू हो गई थी। लेकिन गंगरेल बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने और लगातार बारिश से एनीकट पूरी तरह पानी में डूब गया। तेज धार इतनी खतरनाक है कि अब सड़क का निशान तक नहीं दिखता। इसके बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रशासन की लापरवाही उजागर
Megha Anicut Video: स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस विभाग की ओर से एनीकट मार्ग पर कोई सिपाही तैनात नहीं है। हादसे के दिन भी वहां कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। मगरलोड थाना पुलिस पहले गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने पर चौकसी दिखाती रही, लेकिन अब एनीकट पर सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नदारद हैं। लोगों ने मांग की है कि इस खतरनाक मार्ग पर तत्काल चौकीदार या पुलिसकर्मी की ड्यूटी लगाई जाए, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
टूटा मेघा पुल बना परेशानी की जड़
Megha Mahanadi Bridge: महानदी पर बना पुल 21 सितंबर 2024 को टूट गया। तब से लेकर आज तक इस मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। कुरूद और मगरलोड क्षेत्र के लोग अब राजिम या नगरी होकर आवागमन करने को मजबूर हैं। बता दें कि नब्बे के दशक में कांग्रेस पार्टी से विधायक बनी तत्कालीन विधायक स्व. दीपा साहू के प्रयास से महानदी पर मेघा पुल का निर्माण कराया गया था. 1990 में इस पुल को बनाया गया था। इसका नामकरण स्व. ताराचंद साहू के नाम पर किया गया था। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने प्रदर्शन कर वैकल्पिक मार्ग की मांग की थी। हालांकि प्रशासन ने अस्थायी रपटा मार्ग बनाया, लेकिन उस मार्ग में एक भी गाड़ी नहीं चली और सिर्फ एक ही बारिश में वह भी बह गया।

रेत खनन से कमजोर हुआ पुल
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र से रेत माफियाओं द्वारा अत्यधिक खनन के कारण मेघा पुल के नीचे से तीन पिलर गिर गए थे। नियमों को तक में रखकर पल के नीचे से ही रेट निकलकर रेट बेचा जाने लगा इससे पुल कमजोर होकर दरारों से भर गया। अब यह पुल धीरे-धीरे धंसने लगा है। इसके बाद ग्राम मेघा का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया और ग्रामवासीयों का आवागमन बाधित हो गया।
1 करोड़ का वैकल्पिक मार्ग भी बहा, बढ़ा ग्रामीणों की मुश्किलें
बरसात की शुरुआत में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया रपटा मार्ग भी 24 घंटे की बारिश में बह गया। ठेकेदार ने इस मार्ग को रेतीली मिट्टी से बनाया था, जो तेज बहाव नहीं झेल पाया।
अब सैकड़ों गांवों का संपर्क टूट गया है। लोगों को जरूरी कामों के लिए कई किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। प्रशासन लोगों से सतर्कता बरतने की अपील तो कर रहा है, लेकिन मौके पर निगरानी या वैकल्पिक समाधान नहीं दिख रहा।

46.96 करोड़ से बन रहा उच्चस्तरीय पुल
MLA Ajay Chandrakar: कुरुद विधायक अजय चंद्राकर के प्रयासों के बाद, महानदी नदी पर उच्चस्तरीय पुल और पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 46.96 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। चंद्राकर ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को 12 नवंबर 2024 को पत्र लिखकर वित्त विभाग से शीघ्र स्वीकृति देने की अपील की थी। उन्होंने बताया था कि कुरूद-मेघा मगरलोड मार्ग पर स्थित 973 मीटर लंबा पुराना पुल 21 सितंबर 2024 को क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे आवागमन बाधित है और 75,000 ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं, जिसके चलते क्षेत्र में जन आक्रोश की स्थिति बनी हुई थी। स्वीकृति के बाद जल्द ही पुल निर्माण का क्रय प्रारंभ कर दिया गया है।

मेघा ग्रामवासियों ने की पहल
वैकल्पिक मार्ग को लेकर शासन प्रशासन की सुस्ती के बाद ग्राम समिति मेघा ने पहल करते हुए एनीकट के निकट तटबंद को तोड़कर एनीकट मार्ग में आवागमन के लिए नाले में एक छोटा पुल बनाकर रास्ता निकला गया जिससे विद्यार्थियों कर्मचारियों एवं ग्रामीणों को आने – जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में एनीकट से जान जोखिम में डालकर आवागमन शुरू हुआ था जी बारिश के बाद मुसीबत बन चूका है।

मेघा के व्यापार पर असर
पुल टूटने और मार्ग बाधित होने का सीधा असर मेघा और आसपास के इलाकों के व्यापार पर पड़ा है। माल ढुलाई ठप है और कारोबारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। आस पास के गांव के लोग जो मेघा बाजार एवं व्यापार करने आते थे एवं यहां से होकर गुजरने वाले यात्रियों का आना जाना पूरी तरह बंद हो गया है साथ ही कुरुद मंडी से और बाजार के लिए सब्जी सही समय पर नहीं मिल रहा है व इसके लिए लोगो को राजपुर विशाखापट्नम रोड से होकर जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नया पुल तैयार नहीं होता, तब तक यह परेशानी बनी रहेगी।
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जरूरी है सतर्कता और स्थायी समाधान
एक साल बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने ना तो एनीकट मार्ग पर स्थायी सुरक्षा इंतजाम किए हैं, न ही कोई वैकल्पिक मार्ग बन पाया। ऐसे में लोगों से अपील है कि तेज जल बहाव के दौरान एनीकट या अस्थायी मार्गों से गुजरने से बचें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।



