
छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा के नतीजों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। रविवार को गृहमंत्री विजय शर्मा ने शिकायतों को सुनने के लिए अभ्यर्थियों को अपने रायपुर निवास पर बुलाया था। गृहमंत्री ने समाधान के लिए सभी 9 रेंजों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग टेबल लगवाए थे ताकि शिकायतों का निपटारा मौके पर हो सके। हालांकि, नाराज अभ्यर्थियों ने इन टेबलों पर जाने के बजाय सीधे गृहमंत्री से संवाद किया। करीब 3 घंटे तक चली इस गहमागहमी भरी मुलाकात में युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित धांधली को लेकर अपनी बात रखी। कई अभ्यर्थियों ने इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।
मेरिट लिस्ट के फॉर्मूले पर विवाद: एक ही नाम कई जगहों पर शामिल
अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा विरोध चयन सूची बनाने के तरीके को लेकर है। युवाओं का कहना है कि मूल विज्ञापन में कहीं यह नहीं लिखा था कि अलग-अलग जगहों से अलग मेरिट निकाली जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में कई जिलों और रेंजों से एक साथ सूची जारी होने के कारण एक ही प्रतिभावान छात्र का नाम कई जगह आ रहा है। इससे कट ऑफ मार्क्स पर बुरा असर पड़ रहा है और कई योग्य उम्मीदवार रेस से बाहर हो गए हैं। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि एप्लीकेशन नंबर के आधार पर पूरे राज्य की एक ही कॉमन मेरिट लिस्ट तैयार की जाए, जिससे हर पद पर अलग व्यक्ति का चयन हो सके।
शारीरिक दक्षता परीक्षा में धांधली के आरोप और रिजल्ट में बदलाव
प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने फिजिकल टेस्ट (शारीरिक दक्षता परीक्षा) की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि राजनांदगांव समेत कई केंद्रों पर शारीरिक माप-जोख और दौड़ की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों या संबंधित ठेका कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अभ्यर्थियों ने गृहमंत्री को बताया कि विभाग द्वारा फाइनल रिजल्ट में बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है। छात्रों का कहना है कि अगर व्यवस्था नहीं सुधरती है, तो इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया जाना चाहिए।
7 लाख उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर: मंत्री ने दिया आश्वासन
गौरतलब है कि सितंबर 2023 में पुलिस के 5,963 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था, जिसमें प्रदेशभर से लगभग 7 लाख से ज्यादा युवाओं ने आवेदन किया था। गृहमंत्री विजय शर्मा ने अभ्यर्थियों की शिकायतों को गौर से सुना और उन्हें समझाने की कोशिश की कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत आगे बढ़ रही है। हालांकि, अभ्यर्थी अब भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं और अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। शासन के लिए अब चुनौती यह है कि वह बिना भर्ती रद्द किए इस तकनीकी पेंच को कैसे सुलझाता है ताकि चयनित और प्रतीक्षारत दोनों पक्षों के साथ न्याय हो सके।



