
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र आज यानी 23 फरवरी से शुरू हो रहा है। यह सत्र 20 मार्च तक संचालित होगा जिसमें कुल 15 बैठकें तय की गई हैं। सत्र के पहले दिन की कार्यवाही राज्यपाल रमेन डेका के अभिभाषण से प्रारंभ होगी। राज्यपाल के संबोधन के बाद सदन में कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके तुरंत बाद वित्त मंत्री ओपी चौधरी वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण पटल पर रखेंगे। यह दस्तावेज राज्य की वर्तमान वित्तीय स्थिति और विकास की गति का लेखा-जोखा पेश करेगा।
सत्र के दौरान दिवंगत सदस्यों को दी जाएगी श्रद्धांजलि
संसदीय परंपरा के अनुसार सत्र के पहले दिन उन पूर्व सदस्यों को याद किया जाएगा जिनका हाल ही में निधन हुआ है। इस क्रम में अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक दीनदयाल पोर्ते को सदन में श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। शोक व्यक्त करने के बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित की जा सकती है। राज्यपाल के अभिभाषण और कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर मुख्य चर्चा के लिए 25 फरवरी की तारीख निर्धारित की गई है जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की उम्मीद है।
विधायकों ने पूछे 2800 से ज्यादा सवाल
इस बजट सत्र में जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर विधायकों ने भारी दिलचस्पी दिखाई है। विधानसभा सचिवालय को अब तक कुल 2813 प्रश्नों की सूचनाएं मिली हैं। इनमें से 1437 तारांकित प्रश्न हैं जिनका उत्तर मंत्रियों को सदन में मौखिक रूप से देना होगा। वहीं 1378 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं जिनके लिखित जवाब दिए जाएंगे। इसके अलावा ध्यानाकर्षण की 61 सूचनाएं और शून्यकाल की 9 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं जो दर्शाती हैं कि विपक्ष कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।
24 फरवरी को पेश होगा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट
राज्य के भविष्य और विकास की रूपरेखा तय करने वाला मुख्य बजट 24 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री ओपी चौधरी नई सरकार का यह महत्वपूर्ण बजट प्रस्तुत करेंगे। बजट पेश होने के बाद 26 और 27 फरवरी को इस पर सामान्य चर्चा की जाएगी। इस दौरान विपक्ष बजट के प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगा जबकि सरकार अपनी योजनाओं का बचाव करेगी। प्रदेश की जनता की नजरें इस बजट पर टिकी हैं क्योंकि इसमें कई लोकलुभावन घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है।
अनुदान मांगों पर चर्चा और विनियोग विधेयक की प्रक्रिया
बजट सत्र का दूसरा चरण विभागवार अनुदान मांगों पर आधारित होगा। 9 मार्च से लेकर 17 मार्च तक सदन में अलग-अलग विभागों के बजट आवंटन पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। 17 मार्च को ही विनियोग विधेयक सदन के पटल पर रखा जाएगा जिस पर चर्चा के बाद 18 मार्च को इसे पारित करने की प्रक्रिया पूरी होगी। यह पूरी प्रक्रिया सरकार को राज्य की संचित निधि से खर्च करने का कानूनी अधिकार प्रदान करेगी।



