
Jabarra Eco Tourism Dhamtari: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का छोटा सा गांव जबर्रा अब दुनिया के नक्शे पर अपनी खास जगह बना चुका है। हाल ही में जर्मनी से आए दो बुजुर्ग पर्यटक कोरडुला और झुंगा ने यहां की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाया। इन विदेशी मेहमानों ने गांव के होम स्टे में रुककर स्थानीय संस्कृति को करीब से समझा और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवानों का स्वाद लिया। घने जंगलों और शांत वातावरण के बीच बिताए गए समय की इन सैलानियों ने जमकर तारीफ की और यहां की मेहमाननवाजी से काफी प्रभावित नजर आए।

कुदरती खूबसूरती और आधुनिक सुविधाएं
जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव इको टूरिज्म का बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। यहां की ऊंची पहाड़ियां और सघन वन क्षेत्र पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। खास बात यह है कि घने जंगलों के बीच बसे होने के बाद भी जबर्रा में स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और मोबाइल टावर जैसी सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं। सिंघोला पहाड़ी के शिखर से गरियाबंद और नगरी के जंगलों का जो नजारा दिखता है वह किसी का भी मन मोह लेने के लिए काफी है।
पर्यटन से बदल रही ग्रामीणों की तस्वीर
जबर्रा इको टूरिज्म समिति के अध्यक्ष माधव मरकाम ने बताया कि अब तक ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड और नेपाल सहित कई देशों के 113 पर्यटक यहां का दौरा कर चुके हैं। स्थानीय प्रबंधन ने सैलानियों की सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए 20 सदस्यों की एक विशेष टीम तैनात की है। पिछले पांच महीनों में ही समिति ने पर्यटन गतिविधियों के जरिए 75 हजार रुपये की आय हासिल की है। यह मॉडल न केवल प्रकृति का संरक्षण कर रहा है बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।

प्रशासनिक विजन से बदली पूरे क्षेत्र की किस्मत
इस गांव में पर्यटन की नींव साल 2018-19 के दौरान रखी गई थी। प्रशासन की पहल और करोड़ों रुपये के निवेश से यहां सामुदायिक भवन और होम स्टे जैसे ढांचे तैयार किए गए। आज जबर्रा का यह प्रयोग पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन गया है कि कैसे एक छोटे से आदिवासी अंचल को विश्व पर्यटन के मानचित्र पर लाया जा सकता है। सरकार और स्थानीय समुदाय के आपसी तालमेल से अब यह पूरा क्षेत्र आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



