छत्तीसगढ़ के ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला,एक अप्रैल से सरकारी भवनों में प्री-पेड मीटर अनिवार्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी सरकारी भवनों में एक अप्रैल से प्री-पेड बिजली मीटर लगाने का आदेश जारी किया है। ऊर्जा विभाग के मुताबिक यह व्यवस्था सभी विभागों, दफ्तरों और सरकारी आवासों पर लागू होगी। निर्णय का उद्देश्य बिजली बिलों के लंबित भुगतान पर रोक लगाना और समय पर राजस्व सुनिश्चित करना है।

बकाया बिलों के खुलासे के बाद हरकत में आया विभाग

हाल ही में सामने आई रिपोर्ट में कई सरकारी भवनों पर भारी बिजली बकाया होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई। ऊर्जा सचिव रोहित यादव ने बताया कि स्थिति की समीक्षा के बाद प्री-पेड प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया है ताकि भविष्य में भुगतान में देरी न हो।

मुख्यमंत्री निवास से लेकर मंत्रियों के बंगलों तक बकाया

रिपोर्ट में मुख्यमंत्री निवास, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्रीगण और सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सरकारी आवासों के बिजली बिल बकाया होने का जिक्र था। इसके अलावा कुछ उद्योगपतियों और आईएएस एसोसिएशन पर भी लाखों रुपये की देनदारी सामने आई। इस खुलासे के बाद विभाग ने तुरंत वसूली प्रक्रिया शुरू की।

अब तक 20 लाख से अधिक की वसूली

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग विभागों से अब तक 20 लाख रुपये से ज्यादा की बकाया राशि वसूल की जा चुकी है। वसूली अभियान जारी है और शेष रकम भी जल्द जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि समय पर भुगतान से सरकारी खजाने पर दबाव कम रहेगा।

कैसे काम करेगी नई प्री-पेड व्यवस्था

नई प्रणाली के तहत पारंपरिक पोस्ट-पेड मीटर हटाकर प्री-पेड मीटर लगाए जाएंगे। हर विभाग या संबंधित अधिकारी को कम से कम तीन महीने का अग्रिम रिचार्ज कराना होगा। रिचार्ज खत्म होते ही बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाएगी। इससे खपत और भुगतान दोनों रिचार्ज पर आधारित रहेंगे।

सात दिन की विशेष राहत सुविधा

प्री-पेड मीटर में एक विशेष स्विच दिया जाएगा। रिचार्ज समाप्त होने की स्थिति में इस स्विच को दबाकर सात दिनों के लिए बिजली आपूर्ति बहाल की जा सकेगी। यह सुविधा केवल एक बार मिलेगी। ऊर्जा सचिव रोहित यादव ने साफ किया कि तय अवधि में रिचार्ज नहीं कराने पर कनेक्शन दोबारा बंद हो जाएगा और न्यूनतम तीन महीने का रिचार्ज कराए बिना बहाली नहीं होगी।

पुराने बकाया की भी होगी वसूली

सरकार ने यह भी तय किया है कि भविष्य में किए जाने वाले रिचार्ज से पुराने बकाया बिल की राशि समायोजित की जाएगी। यानी प्री-पेड सिस्टम के जरिए पिछली देनदारियां भी धीरे-धीरे वसूल की जाएंगी। इससे लंबित भुगतान खत्म करने में मदद मिलेगी।

प्रशासनिक अनुशासन पर रहेगा जोर

ऊर्जा विभाग का मानना है कि प्री-पेड मॉडल से जवाबदेही बढ़ेगी और बिजली खर्च पर नियंत्रण रहेगा। विभागों को समय रहते रिचार्ज कराना होगा, जिससे अनावश्यक बकाया नहीं बढ़ेगा। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और एक अप्रैल से यह व्यवस्था पूरे राज्य में लागू कर दी जाएगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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