
छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ कहे जाने वाले मैनपाट में सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाने का एक बड़ा खेल सामने आया है। छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CGMDC) द्वारा बॉक्साइट खनन के लिए ली गई जमीन के बदले बांटे जाने वाले 19 करोड़ रुपये के मुआवजे में भारी धांधली उजागर हुई है। मामला कलेक्टर के संज्ञान में आते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। शुरुआती जांच में पता चला है कि मुआवजा सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनका उस जमीन से कोई लेना-देना ही नहीं है।
बाहरी लोगों को भी बना दिया मुआवजे का हकदार
यह घोटाला मैनपाट के ग्राम उरंगा और बरिमा से जुड़ा है, जहां कुल 244 ग्रामीणों को मुआवजे की राशि मिलनी थी। नियमों को ताक पर रखकर 23 ऐसे लोगों के नाम सूची में जोड़ दिए गए जो न तो इन गांवों के निवासी हैं और न ही वहां उनकी कोई जमीन है। अधिकारियों की मिलीभगत से इन बाहरी लोगों को लाखों रुपये का भुगतान करने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। हैरानी की बात यह है कि इस सूची को तहसीलदार और एसडीएम स्तर से मंजूरी भी मिल चुकी थी।
टॉमन सिंह सोनवानी के बेटे का भी नाम, फॉर्म हाउस को बताया ‘खेती की जमीन’
इस घोटाले के तार बड़े रसूखदारों से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। मुआवजा सूची में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व अध्यक्ष टॉमन सिंह सोनवानी के बेटे का नाम भी शामिल मिला है। जिस जमीन पर फॉर्म हाउस और बाउंड्रीवाल बने हुए हैं, उन्हें रिकॉर्ड में ‘कृषि भूमि’ दिखाकर भारी-भरकम मुआवजा तय किया गया था। कुछ भू-माफियाओं ने भी केवल जमीन घेरकर बाउंड्रीवाल खड़ी की थी, जिन्हें गलत तरीके से किसान बताकर सरकारी पैसा देने की साजिश रची गई।
डेढ़ एकड़ जमीन का 23 एकड़ दिखाया मुआवजा
गड़बड़ी का आलम यह है कि कागजों में जमीन के रकबे को कई गुना बढ़ाकर दिखाया गया। एक किसान जिसके पास वास्तव में केवल डेढ़ एकड़ जमीन थी, उसके नाम पर 23 एकड़ जमीन का मुआवजा प्रकरण तैयार कर लिया गया। इतनी बड़ी हेराफेरी बिना राजस्व विभाग के निचले अधिकारियों की शह के मुमकिन नहीं थी। प्रशासन अब उन सभी फाइलों को खंगाल रहा है जिनमें रातों-रात जमीनों के रिकॉर्ड बदल दिए गए या रकबे में हेरफेर किया गया।
तहसीलदार-पटवारी लाइन हाजिर, अपर कलेक्टर करेंगे जांच
कलेक्टर ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित तहसीलदार और पटवारी को तत्काल प्रभाव से हटाकर जिला मुख्यालय में अटैच कर दिया है। पूरे घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया है। यह समिति अब 244 नामों की सूची का दोबारा भौतिक सत्यापन करेगी। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि दोषियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि एफआईआर दर्ज कर जेल भी भेजा जाएगा।



