
धमतरी: Teacher Bharti Scams: वर्ष 2007 में हुए शिक्षाकर्मी वर्ग-3 भर्ती घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपियों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने और अंकों में हेरफेर कर चयन कराने का आरोप है। इस मामले में आगे और लोगों पर भी गाज गिरने की संभावना है।
फर्जी दस्तावेजों से कराई भर्ती
पुलिस जांच में सामने आया कि कई अभ्यर्थियों ने नकली अनुभव प्रमाण पत्र और अंकों में हेरफेर कर खुद को चयनित कराया। इस वजह से पात्र उम्मीदवार, खासकर अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी, जानबूझकर वंचित कर दिए गए।

गिरफ्तार आरोपी
- ईशु कुमार, निवासी कमरौद
- सीताराम कुर्रे, निवासी मेघा
- कोमल यदु, निवासी मोहंदी

तीनों को 17 सितंबर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले में शिक्षा विभाग के कुछ पूर्व अधिकारी भी संलिप्त हो सकते हैं।
जांच और एफआईआर का सिलसिला
ग्राम चंदना निवासी कृष्ण कुमार साहू ने इस मामले की शिकायत की थी। जांच के बाद 27 सितंबर 2011 को मगरलोड थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद से ही मामला विवेचना में है। अब तक इस मामले में कई धाराएं जोड़ी जा चुकी हैं, जिनमें धोखाधड़ी, दस्तावेजों की जालसाजी और सबूत मिटाने जैसे आरोप शामिल हैं।
भर्ती प्रक्रिया में बड़े खेल के आरोप
- शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के 150 स्वीकृत पदों के बजाय 172 नियुक्तियां की गईं।
- चयन समिति के सदस्यों ने अपने परिजनों को भी पद दिलाए।
- नाबालिग और अयोग्य अभ्यर्थियों को भी नौकरी दी गई।
- करीब 140 पदों पर फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल हुआ, जिनमें डीएड, एनसीसी, स्काउट-गाइड और यहां तक कि विकलांगता प्रमाण पत्र भी शामिल थे।
अब तक की कार्रवाई
जनपद पंचायत द्वारा अब तक 19 शिक्षाकर्मियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, जबकि कई ने इस्तीफा दिया है। पुलिस ने पहले भी 17 शिक्षाकर्मियों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया था, जिनमें से कई को कड़ी सजा मिल चुकी है।
आगे की कार्रवाई की संभावना
पुलिस का कहना है कि मामले में अभी और जांच बाकी है। कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही इस घोटाले में शामिल और लोगों पर शिकंजा कसा जाएगा।
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