
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नवागांव में एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद माहौल बेहद गरमा गया। 85 वर्षीय बूधा बाई साहू के निधन के बाद जब परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, तभी धर्मांतरण का मुद्दा उठ खड़ा हुआ। परिजनों द्वारा शव को गांव में ही दफनाने के फैसले का स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि गांव में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस तैनात करनी पड़ी।
ग्रामीणों और हिंदू संगठनों की दोटूक आपत्ति
विवाद की मुख्य वजह मृतका के बेटे का ईसाई धर्म से जुड़ाव बताया जा रहा है। जैसे ही ग्रामीणों को पता चला कि शव को ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार गांव की जमीन पर दफन किया जाना है, उन्होंने मोर्चा खोल दिया। इस विरोध प्रदर्शन में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी शामिल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने गांव में दफनाने की प्रक्रिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से इस पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
पुलिस की एंट्री और सुलह की कोशिश
स्थिति को हाथ से निकलता देख अर्जुनी थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए घंटों मशक्कत की। संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों ने परिजनों और आंदोलनकारियों को बातचीत की मेज पर लाया। अंत में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद यह तय हुआ कि विवाद को शांत करने के लिए शव को गांव के बजाय शहर ले जाया जाएगा।
शहर के कब्रिस्तान में हुआ अंतिम संस्कार
आपसी सहमति और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच बुजुर्ग महिला के पार्थिव शरीर को धमतरी शहर लाया गया। यहां स्थित क्रिश्चियन कब्रिस्तान में सभी औपचारिकताओं के साथ शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। पुलिस की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, जिससे एक बड़े टकराव की आशंका टल गई। पुलिस ने बताया कि अंतिम संस्कार के दौरान कानून का उल्लंघन करने वाली कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।
शांति समिति की बैठक और मौजूदा हालात
फिलहाल नवागांव में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात रखा गया है। अर्जुनी थाना पुलिस का कहना है कि वे लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि कोई नई चिंगारी न भड़के। प्रशासन आने वाले दिनों में गांव में शांति समिति की बैठक बुला सकता है ताकि भविष्य में ऐसे सामाजिक और धार्मिक विवादों का हल संवाद के जरिए निकाला जा सके।



