स्कूल सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी, अब दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी

रायपुर। प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 43,301 अंशकालिक सफाई कर्मचारी बीते दो महीने से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। लंबे समय से मांगों पर ठोस निर्णय न होने से नाराज कर्मचारी अब दिल्ली कूच की तैयारी में हैं। 17 अगस्त को रायपुर के तूता धरना स्थल में सभी जिलों के पदाधिकारी जुटेंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की रणनीति तय करेंगे।

राज्यभर में चरणबद्ध आंदोलन के बाद अब आर-पार की तैयारी

हड़ताल की शुरुआत 15 जून को हुई थी। इसके बाद 2 जून को ब्लॉक मुख्यालय, 6 जून को जिला स्तर, और 10 जून को राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया गया। कर्मचारी संगठन की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, शिक्षा सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के प्रमुख के नाम ज्ञापन सौंपे गए।

16 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास के घेराव के दौरान पुलिस और कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। इसके बाद शिक्षा सचिव से बातचीत का आश्वासन मिला और 17 जुलाई को मंत्रालय में बैठक भी हुई। सचिव ने कर्मचारियों की मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की बात कही, लेकिन एक महीने बाद भी किसी तरह का निर्णय नहीं आया।

12 अगस्त को केशकाल घाटी में चक्काजाम, अब दिल्ली आंदोलन की तैयारी

मांगें पूरी न होने पर 12 अगस्त को कर्मचारियों ने बस्तर की केशकाल घाटी में चक्काजाम किया। हालांकि, वहां भी शासन की ओर से कोई संवाद नहीं हुआ। अब अगला कदम जंतर-मंतर पर धरना होगा, जिसकी योजना 17 अगस्त की बैठक में तय होगी।

“3000 से 3500 रुपए में घर नहीं चलता” – सफाई कर्मचारी संघ

प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रदीप वर्मा ने बताया कि अधिकांश स्कूलों में चपरासी या भृत्य की नियुक्ति नहीं है, इसलिए सफाई कर्मचारियों को ही अतिरिक्त काम करने पड़ते हैं। बावजूद इसके उन्हें केवल 3000 से 3500 रुपए मासिक मानदेय मिलता है। इतनी कम राशि में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

संघ की प्रमुख मांगें हैं:

  • पूर्णकालिक कर्मचारियों की तरह कलेक्टर दर पर वेतन
  • युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में काम पर बनाए रखना

हड़ताल का असर स्कूलों और बच्चों पर साफ दिख रहा

कर्मचारी संगठन का कहना है कि हड़ताल का असर स्कूलों की साफ-सफाई और व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। कई स्कूलों में गंदगी बढ़ गई है। कहीं-कहीं छात्रों को ही झाड़ू पकड़ाकर सफाई कराई जा रही है, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक नुकसान हो रहा है।

छात्रों को पढ़ाई के बजाय झाड़ू पकड़ाना शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। कर्मचारी संघ का कहना है कि अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

क्या कहती है सरकार?

अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिए हैं। कर्मचारी संघ ने साफ किया है कि जब तक साफ और लिखित आदेश नहीं मिलते, हड़ताल खत्म नहीं होगी।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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