
Korba News: छत्तीसगढ़ के ऊर्जा संभाग कोरबा में बिजली कारखानों से निकलने वाली राख (Fly Ash) के निपटारे के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। सीएसईबी के हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (HTPP) के साइलो लोडिंग सिस्टम में गंभीर धांधली पकड़ी गई है। आरोप है कि यहां ट्रकों में राख लोड किए बिना ही उनके गेट पास जारी किए जा रहे थे। यह खेल लंबे समय से पर्दे के पीछे चल रहा था, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब प्रबंधन ने फाइलों और सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की, तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। इस घोटाले की गूंज अब पूरे विभाग में है और जिम्मेदार अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं।
अधिकारियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी से हो रही थी लूट
इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे एक सोची-समझी सांठगांठ नजर आ रही है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि संयंत्र के कुछ अधिकारी, पीएलसी फील्ड अफसर और राख परिवहन करने वाले ठेकेदार आपस में मिले हुए थे। हर शिफ्ट में ट्रकों की लोडिंग पर्चियों और गेट पास में हेराफेरी की जाती थी। यह केवल नियम विरुद्ध ही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय अपराध है। सूत्रों का कहना है कि कागजों पर गाड़ियां दौड़ रही थीं, जबकि हकीकत में वे संयंत्र के भीतर राख लेने पहुंची ही नहीं थीं। इस हेराफेरी के जरिए सरकारी खजाने को सीधे तौर पर चूना लगाया जा रहा था।
रोजाना 50 ट्रेलरों के फर्जी गेट पास का खुलासा
घोटाले की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां हर दिन करीब 50 ट्रेलरों के फर्जी गेट पास काटे जा रहे थे। चूंकि सिविल विभाग इन्हीं पर्चियों और गेट पास के आधार पर ठेकेदारों के बिल पास करता है, इसलिए बिना काम किए ही करोड़ों का भुगतान किया जा रहा था। जब प्रबंधन ने संयंत्र के गेट और लोडिंग पॉइंट के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो कई ट्रक ऐसे मिले जिन्हें बिना लोडिंग के ही पास जारी कर दिया गया था। इस खुलासे के बाद प्रबंधन ने संबंधित क्षेत्रों में नोटिस चस्पा कर कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी गलती बर्दाश्त नहीं होगी।
प्रबंधन की चेतावनी और सख्त निगरानी के निर्देश
मामले के तूल पकड़ने के बाद सीएसईबी प्रबंधन ने सभी फील्ड ऑपरेटरों और एजेंसियों को अंतिम चेतावनी जारी की है। प्रबंधन ने साफ किया है कि फर्जी पर्ची बनाना गंभीर वित्तीय गड़बड़ी है और इसे केवल अनुशासनहीनता नहीं माना जाएगा। ओएंडएम कार्य कर रही सभी बाहरी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कर्मचारियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखें। यदि दोबारा ऐसी शिकायत मिली, तो न केवल संबंधित कर्मचारियों को सेवा से निकाला जाएगा, बल्कि ठेका कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाकर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
पूरे सिस्टम को डिजिटल निगरानी में लाने की तैयारी
इस घोटाले ने संयंत्र की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रबंधन पूरे सिस्टम को और अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी में है। इसके तहत गेट पास जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑटोमेटेड करने और हर लोडिंग पॉइंट पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अब किसी भी स्तर पर मानवीय हस्तक्षेप को कम किया जाएगा ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो सके। इस कार्रवाई से राख परिवहन से जुड़े ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है और विभाग अब उन सभी पुराने बिलों की भी जांच कर रहा है जो पिछले कुछ महीनों में पास किए गए हैं।



