
Pachpedi Naka Raipur: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित प्रसिद्ध पचपेड़ी नाका चौक का नाम बदलकर ‘संत बाबा गोदड़ी वाला चौक’ किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस चौक का नाम पचपेड़ी इसलिए पड़ा था क्योंकि पुराने समय में यहां पांच पेड़ों का समूह हुआ करता था। अब नगर निगम द्वारा नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके तहत दावा-आपत्ति आमंत्रण सूचना भी एक समाचार पत्र में प्रकाशित की गई है।
संत बाबा ट्रस्ट ने की थी नाम बदलने की मांग
Raipur Pachpedi Naka Name Change: नगर निगम रायपुर द्वारा जारी सूचना में बताया गया कि ब्रह्मस्वरूप संत बाबा गेलाराम ट्रस्ट एवं गोदड़ी वाला धाम, देवपुरी रायपुर ने 4 अप्रैल 2025 को आवेदन कर पचपेड़ी नाका का नाम बदलने की मांग की थी। इसके जवाब में रायपुर जोन क्रमांक 10 के अंतर्गत स्थित इस चौक को ‘संत बाबा गोदड़ी वाला चौक’ करने हेतु 11 जुलाई 2025 तक आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

Baba Godri Wala Chowk: बताया गया है कि नगर निगम की एमआईसी (मेजर इवेंट कमेटी) ने हाल ही में पचपेड़ी नाका चौक का नाम संत गोदड़ी बाबा के नाम पर रखने का प्रस्ताव पारित किया था। प्रस्ताव पारित होने के बाद, नगर निगम के जोन क्रमांक-10 द्वारा आपत्ति और दावा आमंत्रण की प्रक्रिया शुरू की गई, जिस पर अब तक बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं।
इस नाम परिवर्तन को लेकर छत्तीसगढ़ क्रांति सेना, छत्तीसगढ़ समाज और अन्य कई संगठनों ने नाराजगी जताई है। वहीं, रायपुर ग्रामीण के पूर्व विधायक और आरडीए अध्यक्ष नंदकुमार साहू ने भी इस प्रस्ताव से असहमति जताई है। उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में बताया कि “ग्रामीण क्षेत्र के पार्षदों को बातचीत के लिए बुलाया गया है, और इस मुद्दे पर जल्द ही चर्चा की जाएगी।

विरोध में राजनीतिक और सामाजिक संगठन उतरे मैदान में
इस नाम परिवर्तन के खिलाफ छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों और गैर-राजनीतिक संगठनों ने खुला विरोध जताया है। उनका कहना है कि पचपेड़ी नाका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान वाला नाम है, जिसे बदला नहीं जाना चाहिए। यदि नाम बदलना ही है, तो उसे छत्तीसगढ़ के महापुरुषों या संतों के नाम पर रखा जाना चाहिए।

साहू समाज और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने एसपी को सौंपा ज्ञापन
नाम बदलने के विरोध में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना नामक गैर-राजनीतिक संगठन और साहू समाज ने रायपुर एसपी को ज्ञापन सौंपा और प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को रोका नहीं गया, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पचपेड़ी नाका केवल एक चौक नहीं, बल्कि रायपुर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। इसे बदलना जनभावनाओं का अपमान है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।



