
बलौदाबाजार: बलौदाबाजार जिले में हुए वन्य प्राणी गौर (बायसन) के शिकार के मामले में वन विभाग ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अभी भी चार आरोपी फरार हैं। डीएफओ गणवीर धम्मशील ने आश्वस्त किया है कि फरार आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर कठोर सजा दिलाई जाएगी।
वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील के निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी कसडोल अनिल कुमार वर्मा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें उपजेल भेज दिया गया है।
करंट से मौत और अंग काटने का खुलासा
यह घटना 25 अक्टूबर की सुबह की है, जब बिलारी गांव के पास ग्रामीणों ने दुर्गंध आने पर एक विशाल मृत गौर को देखा। जाँच में पाया गया कि गौर के शरीर पर करंट के निशान थे, और उसके सिर और पैर कटे हुए थे।
- मृत्यु का कारण: प्राथमिक जांच में पता चला कि खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए बिछाए गए बिजली के तारों में करंट प्रवाहित किया गया था, जिससे गौर की मौत हुई।
- सुनियोजित शिकार: घटना स्थल से मिले साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि यह केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित शिकार था। शव से मांस और अंग अलग किए गए थे, जो व्यापारिक उद्देश्यों की ओर संकेत देता था।
मृत बायसन थी गर्भवती
पोस्टमार्टम के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मृत बायसन एक मादा गौर थी, जिसके पेट में भ्रूण शावक (Fetous Calf) भी मिला। इस घटना ने वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग को झकझोर कर रख दिया।
एक ही गांव के हैं तीनों गिरफ्तार आरोपी
वन विभाग की टीम ने इस मामले में समेलाल, राजकुमार और दिनेश नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी बलौदाबाजार जिले के सोनाखान तहसील अंतर्गत ग्राम बिलारी के निवासी हैं। पूछताछ में तीनों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उन्होंने बताया कि गौर को करंट से मारने के बाद उसके अंगों को काटकर छिपा दिया गया था।
आदतन अपराधी है मुख्य आरोपी राजकुमार
डीएफओ गणवीर धम्मशील ने बताया कि फरार आरोपियों की पहचान हो चुकी है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। गिरफ्तार आरोपियों में से राजकुमार आदतन अपराधी है। वह पहले भी दो बार करंट लगाकर वन्य प्राणियों के शिकार के मामले में जेल जा चुका है। कुछ महीने पहले जमानत पर बाहर आने के बाद भी उसने यही अपराध दोहराया है। डीएफओ ने ऐसे अपराधी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
वनरक्षक निलंबित, सुरक्षा बढ़ाई गई
25 अक्टूबर की घटना के बाद क्षेत्रीय स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर वनमंडलाधिकारी ने वनरक्षक प्रेमचंद धृतलहरे को तत्काल निलंबित कर दिया था।
डीएफओ गणवीर धम्मशील ने कहा कि इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। अर्जुनी परिक्षेत्र में रात की गश्ती दलों की संख्या बढ़ा दी गई है। साथ ही, ग्राम प्रहरी, वन संरक्षक और मितानिन समूहों को प्रशिक्षण देकर निगरानी में जोड़ा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक जांच नहीं है, बल्कि वन्यजीव सुरक्षा का प्रश्न है, और दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी वन्यजीव को नुकसान पहुँचाने की हिम्मत न करे।
गौर: छत्तीसगढ़ के वन का गौरव
गौर या भारतीय बायसन (Indian Bison) देश का सबसे बड़ा जंगली जानवर है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल एक संरक्षित प्रजाति माना जाता है। छत्तीसगढ़ के जंगलों में गौर को ‘वन का गौरव’ माना जाता है। हालाँकि, बलौदाबाजार के अर्जुनी, बारनवापारा और पलारी क्षेत्र में गौर की संख्या तेजी से घट रही है।



