
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद निवासी और देशभर में अपनी कला के लिए पहचाने जाने वाले दिव्यांग चित्रकार बसंत साहू को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर सम्मानित किया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार 2025 के तहत उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ दिव्यांगजन कलाकार’ की श्रेणी में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान 3 दिसंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में दिया गया।

95% दिव्यांगता, पर हौसलों की उड़ान अनंत
52 वर्षीय बसंत साहू 95% दिव्यांग हैं, लेकिन व्हीलचेयर पर बैठकर भी उन्होंने रंगों के माध्यम से दुनिया को एक अनोखी दृष्टि दी है। 15 सितंबर 1995 को एक भीषण सड़क दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे उनका शरीर निष्क्रिय हो गया था। डॉक्टरों द्वारा ना उम्मीद किए जाने के बावजूद, बसंत ने हिम्मत नहीं हारी और बिस्तर पर लेटे-लेटे ही चित्रकला की यात्रा शुरू कर दी।

व्हीलचेयर से कैनवास तक का प्रेरणादायी सफर
बसंत साहू पिछले 30 वर्षों से लगातार पेंटिंग बना रहे हैं। वे अपने दाएं हाथ में एक पट्टा बांधकर ब्रश को फँसाते हैं और उसी से बड़ी कुशलता से रंगों को कैनवास पर उतारते हैं। उन्हें एक पेंटिंग को पूरा करने में लगभग चार से पाँच दिन लग जाते हैं, लेकिन उनकी हर कलाकृति में संवेदनशीलता, गहराई और भावनात्मक अभिव्यक्ति का अद्भुत संगम झलकता है। उनकी हजारों कलाकृतियां आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित संस्थानों की शोभा बढ़ा रही हैं।

बसंत साहू बोले: आत्मा की उड़ान अनंत होती है
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने के बाद बसंत साहू ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि “जब कर्म समर्पण बन जाए और सीमाएँ साधना, तो पुरस्कार परमात्मा की कृपा बन जाते हैं।” उन्होंने इस सम्मान को अपनी माँ की तपस्या और लोगों के स्नेह का फल बताया। बसंत ने जीवन से सीखी गई बात को साझा करते हुए कहा कि “शरीर सीमित हो सकता है, पर आत्मा की उड़ान अनंत होती है।” उनकी कला यही संदेश देती है कि ‘दिव्यांगता शरीर में होती है, मन में नहीं।’
कलाकृतियों में झलकती है छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
कला प्रेमियों के अनुसार, बसंत की पेंटिंग्स में सौंदर्य, संवेदनशीलता और गहराई का अद्भुत मेल दिखाई देता है। उनकी कलाकृतियों में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, प्रकृति और समकालीन समाज के चित्र जीवंत रूप में दिखाई देते हैं। कला विशेषज्ञों का मानना है कि बसंत की पेंटिंग्स में संघर्ष और सकारात्मकता की कहानी एक साथ झलकती है, जो दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती है। वह आज जीवन के संघर्षों से जूझ रहे लोगों के लिए जीवंत प्रेरणा बन चुके हैं।
पूरे प्रदेश में खुशी की लहर, गणमान्यों ने दी बधाई
बसंत साहू को राष्ट्रीय सम्मान मिलने पर पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। प्रदेश के कई प्रमुख नेताओं और गणमान्यों ने उनकी उपलब्धि को प्रदेश का गौरव बताते हुए शुभकामनाएँ दीं। बधाई देने वालों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा, विधायक अजय चंद्राकर और नगर पालिका कुरुद अध्यक्ष ज्योति भानु चंद्राकर प्रमुख हैं। बसंत फाउंडेशन से जुड़े अनेक लोग और कुरुद के बड़ी संख्या में निवासी भी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
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