
नई दिल्ली: TET Mandatory for Teachers: सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितम्बर को देशभर के शिक्षकों के लिए अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की नौकरी में 5 साल से अधिक सेवा शेष है, उन्हें अनिवार्य रूप से 2 साल के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करनी होगी, अन्यथा उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि –
- 5 साल से अधिक सेवा शेष वाले शिक्षक → 2 साल में टीईटी पास करना अनिवार्य।
- टीईटी में फेल होने पर → शिक्षक को या तो इस्तीफा देना होगा या अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेकर सेवा लाभ लेना होगा।
- 5 साल से कम सेवा शेष वाले शिक्षक → बिना टीईटी भी नौकरी कर सकेंगे, लेकिन उन्हें पदोन्नति (Promotion) नहीं मिलेगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
शीर्ष अदालत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) को लागू करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। अदालत ने यह भी माना कि दशकों से सेवा दे रहे गैर-टीईटी शिक्षक भी छात्रों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं, इसलिए उन्हें तत्काल बाहर करना अनुचित होगा। इसी कारण उन्हें 2 साल की समय-सीमा दी गई है।
पदोन्नति और सेवा लाभ पर असर
- जिन शिक्षकों ने टीईटी पास नहीं किया है और नौकरी में 5 साल से कम समय बचा है, वे सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रहेंगे, लेकिन उन्हें कोई प्रमोशन नहीं मिलेगा।
- जो शिक्षक टीईटी पास नहीं कर पाएंगे लेकिन 5 साल से अधिक सेवा शेष है, उन्हें जबरन सेवानिवृत्ति लेनी होगी। हालांकि, वे टर्मिनल बेनिफिट्स (सेवा लाभ) के हकदार होंगे।
अल्पसंख्यक स्कूलों पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में आए उस फैसले पर भी पुनर्विचार की बात कही है, जिसमें कहा गया था कि आरटीई कानून अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू नहीं होता। अदालत ने इस मुद्दे को सात जजों की बड़ी संविधान पीठ के पास भेजा है।



