Love Marriage: अनोखी परंपरा पर विवाद: दामाद के घर 500 लोगों का धरना, लव मैरिज के बदले ₹2 लाख और ‘मुर्गा-बकरा भात’ की मांग

कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पखांजूर इलाके के ग्राम पंचायत विष्णुपुर में एक प्रेम विवाह (लव मैरिज) के बाद अनोखा विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र की एक आदिवासी युवती से शादी करने वाले दामाद के घर पर युवती के समाज के करीब 500 लोग डेरा डालकर बैठ गए हैं। समाज की मांग है कि दामाद को उनकी परंपरा के तहत ‘मुर्गा-बकरा भात’ खिलाना होगा और साथ ही ₹2 लाख मूल्य की सामग्री दंडस्वरूप देनी होगी।

तीन साल पहले हुई थी कोर्ट मैरिज

मामला विष्णुपुर पीवी 101 के रहने वाले प्रभाष विश्वास (26) और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की अलीशा पोटामी (25) का है। दोनों ने तीन साल पहले कोर्ट मैरिज की थी। अब जब युवती अपने ससुराल पहुँची है, तो उसका आदिवासी समाज भी दामाद के घर पहुँच गया है।

अपने साथ राशन, बोरिया-बिस्तर और खाना बनाने का सामान लेकर आए लोग

युवती के गाँव भूमकाम (गढ़चिरौली) से शुक्रवार को करीब 500 लोग विष्णुपुर पहुँचे हैं। वे अपने साथ राशन, बोरिया-बिस्तर और खाना बनाने का सारा सामान लेकर आए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक समाज की परंपरा पूरी नहीं होती, वे गाँव नहीं छोड़ेंगे।

शादी से नहीं, रीति न निभाने से आपत्ति

समाज प्रमुख कोतुराम पोटवी और नितिन पद्दा ने बताया कि उन्हें शादी से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि यह उनकी आदिवासी रीति है, जिसके तहत किसी अन्य समाज में शादी होने पर दामाद को समाज को भोज देना होता है और तय सामग्री देनी पड़ती है। उनका दावा है कि यह उनके समाज की पहचान है और इसे निभाना जरूरी है।

₹30 हजार पर अड़ा दामाद का परिवार

विवाद की वजह पैसों का अंतर है। युवक का परिवार समाज को ₹30 हजार देने के लिए तैयार है, जबकि समाज के लोग ₹2 लाख की सामग्री की मांग पर अड़े हुए हैं।

मामला बढ़ता देख पीवी 101 के सरपंच ने पुलिस को इसकी सूचना दी है। बांदे थाना प्रभारी मनीष नेताम ने बताया कि पुलिस मौके पर मौजूद है और दोनों पक्षों में बातचीत जारी है। बारिश के कारण समाज के सदस्यों को गाँव के स्कूल में ठहराया गया है। वहीं, युवक-युवती सुरक्षा कारणों से गाँव से बाहर चले गए हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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