
रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य की परीक्षा प्रणाली में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक के विद्यार्थियों का अंतिम परिणाम नए मूल्यांकन पैटर्न पर तैयार किया जाएगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाना और पूरे शैक्षणिक सत्र में सतत मूल्यांकन (Continuous Evaluation) को बढ़ावा देना है।
शासन द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, अब छात्रों का रिजल्ट केवल वार्षिक परीक्षा के प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाओं के अंकों को एकीकृत रूप में जोड़कर तैयार होगा। इसका सीधा मतलब है कि अब पूरे सालभर की मेहनत और निरंतर प्रगति ही छात्रों के परिणाम में दिखाई देगी।

नया सिस्टम: सिर्फ परीक्षा नहीं, पढ़ाई की गुणवत्ता पर जोर
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई प्रणाली का मकसद केवल परीक्षा के तरीके को बदलना नहीं, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता और निरंतर सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करना है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, यह नई व्यवस्था छात्रों को पूरे सत्र में नियमित रूप से अध्ययन के लिए प्रेरित करेगी, जिससे ‘एग्जाम डे प्रेशर’ कम होगा और यह बच्चों के संपूर्ण मूल्यांकन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
कक्षा-वार नया मूल्यांकन फॉर्मूला
शासन पत्र के अनुसार, परीक्षा प्रणाली में किए गए बदलाव और उनके भारांक (Weightage) इस प्रकार हैं:
- कक्षा 1 से 4 और 6 से 7 तक:
- त्रैमासिक परीक्षा के अंकों का 20%
- अर्धवार्षिक परीक्षा के अंकों का 20%
- वार्षिक परीक्षा के अंकों का 60%
- इन तीनों को जोड़कर अंतिम परिणाम तैयार किया जाएगा (फार्मेट: 20+20+60%)।
- कक्षा 5वीं और 8वीं:
- अर्धवार्षिक परीक्षा के अंकों का 30% भारांक
- वार्षिक परीक्षा के अंकों का 70% भारांक
- दोनों का सम्मिलित औसत लेकर अंतिम रिजल्ट जारी होगा।
- कक्षा 9वीं और 11वीं (माध्यमिक शिक्षा मंडल के तहत):
- अर्धवार्षिक परीक्षा का 30% भारांक
- वार्षिक परीक्षा का 70% भारांक
- इस परिवर्तन पर अमल के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को अलग से प्रस्ताव भेजा जाएगा।
स्कूलों को व्यवस्था लागू करने के सख्त निर्देश
शिक्षा विभाग ने सभी प्राचार्यों और प्रधानपाठकों को निर्देश दिए हैं कि वे नई मूल्यांकन प्रणाली की जानकारी छात्रों और अभिभावकों तक अनिवार्य रूप से पहुँचाएँ। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन और अंक प्रविष्टि नई नीति के अनुसार ही हो। विभाग ने चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर पुरानी प्रणाली अपनाने पर संबंधित की जवाबदेही तय की जाएगी। इस बदलाव से कमजोर छात्रों की समय पर पहचान कर उन्हें अतिरिक्त सहायता देना भी आसान हो जाएगा।



