
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की नई संगठनात्मक मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों में एक ऐसी लापरवाही सामने आई है जिसने पूरी पार्टी को शर्मसार कर दिया है। गरियाबंद जिले के इंदागांव मंडल के लिए जारी सूची में स्वर्गीय रूपेंद्र सोम को अध्यक्ष बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि रूपेंद्र सोम का निधन 22 अगस्त 2025 को ही हो चुका है। उनके दुनिया से जाने के पांच महीने बाद पार्टी ने उन्हें सक्रिय पद की जिम्मेदारी सौंप दी। जैसे ही यह सूची सोशल मीडिया पर आई, संगठन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए।
मृत नेता को नई जिम्मेदारी मिलने से मचा बवाल
स्वर्गीय रूपेंद्र सोम कांग्रेस के समर्पित और जाने-माने नेता थे। वे अपने जीवनकाल में ब्लॉक अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुके थे और क्षेत्र में उनकी गहरी पकड़ थी। उनके निधन के समय स्थानीय और प्रदेश स्तर के कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की थी। इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव मलकीत सिंह गैदू के हस्ताक्षर से जारी सूची में उनका नाम शामिल होना यह दर्शाता है कि नियुक्ति से पहले किसी भी तरह का जमीनी सत्यापन नहीं किया गया। यह न केवल प्रशासनिक चूक है बल्कि दिवंगत नेता के परिवार की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है।

संवाद की कमी या पुरानी फाइल का खेल
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर दो तरह की बातें हो रही हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का तर्क है कि यह एक तकनीकी गलती हो सकती है और पुराने डाटा बेस को अपडेट न करने की वजह से ऐसा हुआ होगा। वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह संगठन के भीतर संवाद और तालमेल के भारी अभाव का नतीजा है। जिला इकाई से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक किसी ने भी नामों की दोबारा जांच करने की जहमत नहीं उठाई।
विपक्ष को मिला हमला करने का मौका
गरियाबंद से शुरू हुआ यह विवाद अब पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन गया है। विरोधियों का कहना है कि जो पार्टी अपने जीवित और मृत नेताओं में फर्क नहीं कर पा रही, वह प्रदेश की जनता की सुध क्या रखेगी। जिला कांग्रेस कमेटी अब इस मामले में लीपापोती करने में जुटी है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सूची में सुधार किया जाएगा, लेकिन इस घटना ने कार्यकर्ताओं के मनोबल को जरूर प्रभावित किया है। अब देखना होगा कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर क्या कार्रवाई होती है।



