
छत्तीसगढ़ पुलिस की साख पर एक बार फिर गहरा दाग लगा है। साल 2016 बैच की बहुचर्चित महिला DSP कल्पना वर्मा को लेकर एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पुलिस मुख्यालय (PHQ) की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, साल 2018 में चंद्रखुरी पुलिस अकादमी में विभागीय परीक्षा के दौरान कल्पना वर्मा को नकल करते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया था। कायदे से उन पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन रसूख के चलते न सिर्फ मामला दबा दिया गया, बल्कि उन्हें शान से पासिंग आउट परेड में शामिल होने का मौका भी दिया गया।
परीक्षा हॉल में किताब लेकर पहुंची थीं अधिकारी ,रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
यह वाकया तब का है जब चंद्रखुरी अकादमी में प्रशिक्षण के बाद लिखित परीक्षा चल रही थी। परीक्षा की निगरानी के लिए पुलिस मुख्यालय से एडिशनल एसपी पूजा अग्रवाल और डीएसपी चंदन सिंह नेताम को तैनात किया गया था। जांच के दौरान निरीक्षकों ने पाया कि कल्पना वर्मा हॉल के भीतर पूरी किताब लेकर पहुंच गई थीं। उनके साथ तीन अन्य प्रशिक्षु डीएसपी भी नकल की सामग्री के साथ धरे गए थे। निरीक्षकों ने मौके पर ही पंचनामा तैयार किया और इसकी आधिकारिक सूचना उच्चाधिकारियों को भेज दी।
ठंडे बस्ते में डाल दी गई जांच की फाइल
नकल प्रकरण दर्ज होने के बाद उम्मीद थी कि संबंधित प्रशिक्षु अधिकारियों पर गाज गिरेगी। हालांकि, कल्पना वर्मा के मामले में कहानी ने दूसरा मोड़ ले लिया। सूत्रों की मानें तो जैसे ही फाइल पुलिस मुख्यालय पहुंची, उसे रसूखदारों के दबाव में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। डीआईजी आरएस नायक ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उस समय नकल का मामला सामने आया था और रिपोर्ट भी बनाई गई थी, लेकिन आगे कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया।
पासिंग आउट परेड में शामिल होना बना रहस्य
नियमों के मुताबिक, प्रशिक्षण के दौरान गंभीर कदाचार में लिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों को पद से पृथक या दंडित किया जाता है। इसके उलट, कल्पना वर्मा को ट्रेनिंग से बाहर करने के बजाय परेड का हिस्सा बनने की अनुमति दी गई। विभाग की इस मेहरबानी ने ईमानदार पुलिस अधिकारियों के बीच भी असंतोष पैदा किया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पीएचक्यू का संरक्षण कुछ चुनिंदा अधिकारियों के लिए ढाल का काम कर रहा है?
अब ‘लव ट्रैप’ और करोड़ों की वसूली के गंभीर आरोप
वर्तमान में डीएसपी कल्पना वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार मामला और भी गंभीर है। रायपुर के एक बड़े कारोबारी दीपक टंडन ने उन पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। कारोबारी का दावा है कि कल्पना वर्मा ने उन्हें ‘लव ट्रैप’ में फंसाया और फिर डरा-धमकाकर करीब 2.5 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। आरोप यहीं खत्म नहीं होते, कारोबारी के मुताबिक उनसे हीरे-सोने के गहने, लग्जरी कार और यहां तक कि एक होटल भी अपने भाई के नाम पर लिखवा लिया गया।
व्हाट्सएप चैट और सीसीटीवी फुटेज आए सामने
पीड़ित व्यवसायी ने अपने दावों की पुष्टि के लिए पुलिस को कई अहम सबूत सौंपे हैं। इनमें कथित व्हाट्सएप चैट और सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं, जो डीएसपी की भूमिका पर सवाल खड़े करते हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई गई है। हालांकि, इतने पुख्ता सबूत होने के बाद भी अब तक डीएसपी के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होना चर्चा का विषय बना हुआ है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच का दिखावा
हाल ही में प्रदेश में एक अन्य मामले में स्पा सेंटर से अवैध वसूली के वीडियो सामने आने के बाद एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। इसी तर्क पर अब कल्पना वर्मा के निलंबन की मांग भी तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि जब एक अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है, तो इतने बड़े आरोपों के बावजूद कल्पना वर्मा को क्यों बचाया जा रहा है? जांच के लिए नियुक्त किए गए अधिकारियों के अचानक तबादलों ने भी संदेह को गहरा कर दिया है।
खाकी की साख बचाने के लिए कड़े कदम की मांग
इस पूरे प्रकरण ने छत्तीसगढ़ पुलिस की छवि को जनता की नजरों में धूमिल किया है। विभागीय परीक्षा में नकल से लेकर निजी जीवन में भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग के आरोपों तक, कल्पना वर्मा का करियर विवादों से घिरा रहा है। अब देखना यह होगा कि गृह विभाग और पीएचक्यू इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर कोई कड़ा कदम उठाते हैं या फिर रसूख का खेल इसी तरह जारी रहेगा।



