CG EOW Raid: छत्तीसगढ़ में EOW की बड़ी छापामार कार्रवाई, सुबह-सुबह एक साथ 10 ठिकानों पर दबिश

रायपुर: CG EOW Raid: छत्तीसगढ़ में 2 हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले और कोयला स्कैम से जुड़े मामलों में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने शनिवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। सुबह-सुबह रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा सहित 10 ठिकानों पर एकसाथ छापामार कार्रवाई की गई। सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई अब भी जारी है।

रायपुर, बिलासपुर और जांजगीर में छापे

मिली जानकारी के अनुसार, ईओडब्ल्यू की टीम ने रायपुर के देवनगरी इलाके में शराब कारोबारी अवधेश यादव के घर पर दबिश दी। वहीं, बिलासपुर में कोयला कारोबार से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी हुई। रायपुर में 3 से 4 ठिकानों समेत प्रदेशभर में कुल 10 जगहों पर कार्रवाई की जा रही है।

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा में भी ईओडब्ल्यू की टीम सक्रिय है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस शासनकाल में सीएम सचिवालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी के घर पर भी तड़के एसीबी ने छापा मारा। जांच एजेंसी को शक है कि उसका बेटा कोयले का कारोबार करता है और सचिवालय में पदस्थापना के बाद उसकी आमदनी अचानक बढ़ गई।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ का यह मामला देश के सबसे बड़े घोटालों में गिना जा रहा है। ईडी (ED) ने इसकी जांच में 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी का खुलासा किया है। ईडी ने इस मामले में एसीबी/ईओडब्ल्यू में एफआईआर दर्ज कराई थी।

जांच में सामने आया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। ईडी के आरोप पत्र के अनुसार, फरवरी 2019 से आबकारी विभाग में संगठित भ्रष्टाचार शुरू हुआ था।

कैसे शुरू हुआ शराब घोटाला

वेलकम डिस्टलरी से जुड़े राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल, हीरालाल जायसवाल और नवीन केडिया के संपर्क अधिकारी संजय फतेहपुरिया एक गुप्त मीटिंग में पहुंचे। इस बैठक में एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह भी शामिल थे। यहाँ अनवर ढेबर ने तय किया कि डिस्टलरी से सप्लाई होने वाली हर पेटी शराब पर कमीशन देना होगा। बदले में डिस्टलरी संचालकों को रेट बढ़ाने का आश्वासन दिया गया।
पैसे के लेन-देन को आसान बनाने के लिए कारोबार को ए, बी और सी पार्ट में बांटा गया। शराब दुकान संचालकों को सरकारी कागजों पर खपत दर्ज न करने की हिदायत दी गई और दुकानों तक बिना शुल्क चुकाए नकली होलोग्राम वाली शराब सप्लाई की जाने लगी।

2,174 करोड़ की बंटवारा लिस्ट

  • नेता-मंत्री: ₹1,392 करोड़ 45 लाख
  • 3 डिस्टलर्स: ₹358 करोड़ 65 लाख
  • अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा: ₹181 करोड़ 52 लाख
  • आबकारी विभाग: ₹90 करोड़ 76 लाख
  • जिला आबकारी अधिकारी व दुकान कर्मचारी: ₹90 करोड़ 76 लाख
  • विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह: ₹60 करोड़ 50 लाख

किन जिलों में खपाई गई नकली शराब?

रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, कबीरधाम, बालोद, महासमुंद, धमतरी, बलौदाबाजार, गरियाबंद, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, कोरबा, बेमेतरा और रायगढ़।

अवैध शराब कारोबार की शुरुआत

शुरुआत में हर महीने 200 ट्रकों से करीब 800 पेटियां सप्लाई होती थीं, जिसकी कीमत ₹2,840 प्रति पेटी थी। बाद में यह सप्लाई बढ़कर हर महीने 400 ट्रक हो गई और रेट ₹3,880 प्रति पेटी कर दिया गया। EOW की जांच में सामने आया कि 3 साल में 60 लाख से ज्यादा पेटियां अवैध रूप से बेची गईं।

सिंडिकेट का कोर ग्रुप और उनकी भूमिका

  • अनिल टुटेजा: सिंडिकेट का संरक्षक, सरकारी रसूख का इस्तेमाल।
  • अनवर ढेबर: होटल कारोबारी, घोटाले का मुख्य प्लानर और पैसों का बंटवारा तय करता था।
  • एपी त्रिपाठी: कांग्रेस सरकार में CSMCL के MD, कैश कलेक्शन, मैनपावर और होलोग्राम सप्लाई अपने लोगों को दिलाई।
  • विकास अग्रवाल: नकली होलोग्राम शराब की सप्लाई के बाद पैसे वसूलता था।
  • अरविंद सिंह: पत्नी के नाम से बोतल बनाने का प्लांट चलाया, नकली होलोग्राम व बोतल सप्लाई करता था।
  • त्रिलोक सिंह ढिल्लन: शराब ठेकेदार, कंपनियों के जरिए पैसा इकट्ठा कर अचल संपत्ति में निवेश करता था।
  • अन्य आरोपी: सिद्धार्थ सिंघानिया, सत्येंद्र प्रकाश गर्ग, नवनीत गुप्ता, विधु गुप्ता, प्रकाश शर्मा, सोहन वर्मा, पीयूष बिजलानी, नवीन केडिया, भूपेंद्र पाल सिंह भाटिया और राजेंद्र जायसवाल – सभी की भूमिका नकली शराब बनाने, सप्लाई करने और पैसा इकट्ठा करने में थी।

छत्तीसगढ़ का कोल स्कैम

ED की जांच में यह भी सामने आया कि छत्तीसगढ़ में 570 करोड़ रुपये का कोल घोटाला हुआ। इसमें 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई।
सिंडिकेट ने कोल व्यापारियों से अवैध वसूली करने के लिए ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन कर दिया। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इसका आदेश जारी किया।

पूरे मामले का मास्टरमाइंड कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को बताया गया है। व्यापारी से प्रति टन ₹25 की वसूली होती थी और यह रकम सीधे सिंडिकेट के पास जमा होती थी। इसी अवैध वसूली से कुल ₹570 करोड़ की रकम इकट्ठी की गई।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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