
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सल-मुक्त भारत मिशन के बीच डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड (DRG) के तीन बहादुर जवान शहीद हो गए हैं। 3 दिसंबर 2025 को बस्तर संभाग के बीजापुर–दंतेवाड़ा बॉर्डर पर सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में ये शूरवीर वीरगति को प्राप्त हुए। इस निर्णायक कार्रवाई में जवानों ने 12 माओवादियों को न्यूट्रलाइज कर बड़ा पलटवार किया है। शहीद हुए जवानों में प्रधान आरक्षक मोनू वडाड़ी, आरक्षक दुकारू गोंडे और आरक्षक रमेश सोड़ी शामिल हैं। शहीदों की यह वीरगाथा युवा पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगी।
शहीद जवानों के नाम, बस्तर मुठभेड़ में दिया सर्वोच्च बलिदान
Martyrs of Bastar: छत्तीसगढ़ की नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में डीआरजी के इन तीन जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। ये तीनों जवान नक्सलियों से शेर की तरह डटकर लड़े। बस्तर के सर्वाधिक प्रभावित इलाके में हुई इस मुठभेड़ में दोनों ओर से भारी मात्रा में गोलियां चलीं, जिसमें जवानों को यह क्षति उठानी पड़ी। मुठभेड़ में दो जवान घायल भी हुए हैं, जिनके उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है और वे खतरे से बाहर हैं। क्षेत्र में लगातार सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है।
मुख्यमंत्री साय ने दी श्रद्धांजलि, बोले- बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा
डीआरजी जवानों की शहादत पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शोक-संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हमारे जवानों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
लाल आतंक का अंत निकट, माओवाद के खात्मे का संकल्प
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुठभेड़ में मिली इस सफल कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लाल आतंक का अंत अब बहुत निकट है। उन्होंने सरकार और सुरक्षा बल के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि हमारी सरकार ‘माओवाद के पूर्ण खात्मे’ के संकल्प पर दृढ़ है। जब तक बस्तर के अंतिम गाँव तक शांति, सुरक्षा और विकास का प्रकाश नहीं पहुँच जाता, तब तक हमारा अभियान जारी रहेगा।



