धमतरी माँ अंगारमोती मंदिर में निसंतान महिलाओं के ऊपर बैगाओं के चलने जैसी परंपरा पर बवाल, प्रथा बंद कराने अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने कलेक्टर को लिखा पत्र

धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गंगरेल बांध के किनारे स्थित प्रसिद्ध माँ अंगारमोती मंदिर की एक पुरानी रस्म अब विवादों के घेरे में आ गई है। संतान प्राप्ति के लिए निसंतान महिलाओं के ऊपर बैगाओं के चलने की इस परंपरा को अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने अमानवीय और अंधविश्वासपूर्ण बताते हुए कलेक्टर को पत्र लिखा है और इसे तत्काल बंद करने की मांग की है।

संतान सुख के लिए पेट के बल लेटकर रस्म निभाती हैं महिलाएँ

हर साल दिवाली के बाद पहले शुक्रवार को लगने वाले ‘मड़ई’ मेले में हजारों की भीड़ जुटती है। इस दौरान 54 गांवों से देव-विग्रह (Dev-Vigrah) लेकर बैगाओं का दल मंदिर पहुंचता है। प्राचीन मान्यता है कि संतान सुख की कामना लिए सैकड़ों महिलाएं पेट के बल लेट जाती हैं और बैगाओं का दल अपने डांग-डोरी (Dand-Dori) और त्रिशूल के साथ उनके ऊपर से गुजरता है। पिछले साल भी 350 से अधिक महिलाओं ने नींबू-नारियल लेकर बाल खोलकर यह ‘परण’ रस्म निभाई थी।

डॉ. दिनेश मिश्रा ने बताया ‘अमानवीय कुरीति’

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्रा ने इस प्रथा को महिलाओं के सम्मान का अपमान बताते हुए कलेक्टर को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और अनुष्ठान की स्वतंत्रता सबको है, लेकिन संतान प्राप्ति के नाम पर महिलाओं को खतरे में डालने वाले ऐसे हानिकारक रिवाज और कुरीतियों को बंद किया जाना चाहिए।

‘संतानहीनता’ के लिए सिर्फ महिलाएँ ज़िम्मेदार नहीं

डॉ. मिश्रा ने इस परंपरा की अवैज्ञानिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संतानहीनता (Infertility) की समस्या सिर्फ महिलाओं की नहीं, बल्कि पुरुषों की भी हो सकती है, फिर भी सिर्फ महिलाओं को ही जिम्मेदार समझकर बैगाओं के पैरों तले लेटना पड़ता है, जो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से हानिकारक है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस रस्म से महिलाओं को अंदरूनी चोटें भी लग सकती हैं।

आधुनिक चिकित्सा और जागरूकता पर ज़ोर

डॉ. मिश्रा ने कहा कि आज के वैज्ञानिक युग में निसंतान दंपतियों के लिए आईवीएफ (IVF) और अन्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी कुरीतियों को बढ़ावा देने के बजाय जागरूकता फैलानी चाहिए और दंपतियों को सही इलाज की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

जनजागरण अभियान चलाएगा अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति

डॉ. दिनेश मिश्रा ने इस मुद्दे पर मंदिर समिति के पदाधिकारियों और महिला आयोग से चर्चा करने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, उनकी समिति जनजागरण अभियान भी चलाएगी ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके और ऐसी हानिकारक परंपराएँ समाप्त हों। धमतरी प्रशासन ने फिलहाल इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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