
कांकेर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिनें इन दिनों अपनी मेहनत की कमाई के लिए भटकने को मजबूर हैं। समय पर प्रोत्साहन राशि न मिलने की वजह से सैकड़ों मितानिनों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ मितानिन नागरिक जागरूक संस्था ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि पिछले एक साल से भुगतान की प्रक्रिया बेहद सुस्त रही है। हैरानी की बात यह है कि मितानिनों से काम तो लगातार लिया जा रहा है लेकिन जब पैसे देने की बारी आती है तो बजट और कागजी खानापूर्ति का हवाला देकर उन्हें टाल दिया जाता है।
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन: राज्यांश और केंद्रांश दोनों ही भुगतान हैं लंबित
मितानिनों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले चार महीनों से उन्हें राज्यांश और केंद्रांश (राज्य और केंद्र सरकार का हिस्सा) का भुगतान नहीं मिला है। अधिकारियों द्वारा बार-बार सिस्टम अपडेट होने का बहाना बनाया जा रहा है। मितानिनों का कहना है कि जब अन्य सरकारी विभागों में कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल रहा है तो फिर स्वास्थ्य सेवाओं में दिन-रात एक करने वाली इन महिलाओं के साथ ही भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
परिजनों का पालना हुआ मुश्किल: बिना तय तारीख के अटकी है राशि
प्रोत्साहन राशि का भुगतान किसी निश्चित तारीख पर नहीं होने से मितानिनों के घरेलू खर्चों का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। ग्रामीण इलाकों में सेवाएं देने वाली इन महिलाओं के लिए यह राशि ही आय का मुख्य जरिया है। समय पर पैसा न मिलने से उनके बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी पारिवारिक जिम्मेदारियां अधर में लटक गई हैं। मितानिनों ने साफ कहा है कि वे अब और इंतजार नहीं कर सकतीं क्योंकि बिना पैसे के काम करना अब उनके बस से बाहर होता जा रहा है।
आंदोलन की आखिरी चेतावनी: प्रशासन को सौपे थे 3 जनवरी तक का समय
अपनी मांगों को लेकर मितानिनों ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आज 3 जनवरी 2026 तक उनके सभी लंबित भुगतानों का निपटारा नहीं किया गया तो वे काम बंद कर सड़कों पर उतरेंगी। संस्था ने स्पष्ट कर दिया है कि इस आंदोलन से होने वाली किसी भी अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। जिले भर की मितानिनें अब एकजुट होकर बड़े प्रदर्शन की तैयारी में जुट गई हैं जिससे आने वाले दिनों में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।



