
गरियाबंद: देवभोग में चल रहे सांसद खेल महोत्सव में सोमवार को अव्यवस्थाओं का आलम देखने को मिला। आयोजन में बजट के अभाव ने व्यवस्था की पोल खोल दी। स्कूली छात्र और खिलाड़ी मैदान तक मालवाहक वाहनों में भरकर लाए गए ताकि परिवहन का खर्च बचाया जा सके। खिलाड़ियों के लिए न तो पैक्ड पानी उपलब्ध था और न ही जरूरी सामग्री।
मैदान में छात्रों की भीड़, हैंडपंप से बुझाई प्यास
खेल मैदान में सैकड़ों छात्र-छात्राएं जुटे थे, लेकिन उन्हें पीने के लिए साफ पानी तक नहीं मिला। आयोजकों ने पानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की थी। खिलाड़ियों को स्कूल परिसर के हैंडपंप से खुद पानी भरकर पीना पड़ा, जबकि वह पानी पीने योग्य नहीं था। खेल समाप्त होने के बाद भी कई खिलाड़ी मैदान में खुद से पानी की व्यवस्था करते नजर आए।

भोजन व्यवस्था में देरी, शिक्षकों के आग्रह पर बदला चावल
खिलाड़ियों के लिए भोजन की तैयारी भी बदहाल रही। शुरुआत में सरकारी चावल से भोजन बनाने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ शिक्षकों के आग्रह पर बाद में प्रीमियम चावल मंगवाया गया। सरकारी रसोइयों के भरोसे काम चलाने के कारण भोजन तैयार होने में काफी देर लगी। अंततः दोपहर दो बजे के बाद भोजन कराया जा सका। भोजन सामग्री और गुणवत्ता में भी बजट की कमी साफ नजर आई।

मैदान में चुनाई तक नहीं, जरूरी सामग्री गायब
खेल मैदान की तैयारी में भी लापरवाही साफ दिखी। चुना तक पर्याप्त मात्रा में नहीं डाला गया था। वहीं ग्लूकोज और ऑरेंज कैंडी जैसी जरूरी सामग्री भी खिलाड़ियों को उपलब्ध नहीं कराई गई। कई खिलाड़ियों ने कहा कि उन्हें खेल के दौरान ऊर्जा के लिए किसी प्रकार की सप्लीमेंट सामग्री नहीं दी गई।
1100 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा, 50 प्रतिशत मुकाबले निपटे
महोत्सव में 17 संकुल केंद्रों, शासकीय महाविद्यालयों और नगरीय निकाय क्षेत्रों से कुल 19 सेक्टरों के 1100 खिलाड़ियों ने भाग लिया। मैदान खिलाड़ियों से खचाखच भरा रहा। कार्यक्रम की शुरुआत एसडीएम आर.एस. सोरी, सीईओ बगतीश भगत, सीएमओ दुष्यंत साहू और बीईओ विनय पटेल की मौजूदगी में हुई। खेल तीन आयु वर्गों में बंटे हुए हैं, जिनमें आठ एकल और तीन सामूहिक विधाओं में मुकाबले हुए। पहले दिन लगभग आधे खेल पूरे हो सके। प्रतियोगिता के सफल संचालन के लिए 35 शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आयोजन के नाम पर फोटो, लेकिन फंड नहीं
सांसद खेल महोत्सव का उद्देश्य स्कूली प्रतिभाओं को मंच देना और खेल संस्कृति को बढ़ावा देना बताया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखी। आयोजन के फ्लेक्स और बैनरों पर प्रधानमंत्री और सांसद के बड़े-बड़े फोटो तो लगाए गए, लेकिन खेल आयोजन के लिए कोई बजट जारी नहीं किया गया।

कलेक्टर द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार विभिन्न विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। जनपद पंचायत को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जबकि एसडीएम, नगर निकाय और खंड शिक्षा अधिकारी आयोजन की निगरानी कर रहे हैं।
“निर्देश के आधार पर कराया जा रहा आयोजन”
देवभोग जनपद पंचायत के सीईओ बी. भगत ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अन्य विभागों के सहयोग से आयोजन कराया जा रहा है। अभी तक किसी प्रकार का बजट जारी नहीं हुआ है, लेकिन उम्मीद है कि आगे फंड मिल सकता है।



