झीरम नरसंहार की जांच में नया मोड़: कांग्रेस प्रवक्ता ने आयोग को सौंपी चिट्ठी, रमन सिंह और कवासी लखमा समेत कई दिग्गजों के नार्को टेस्ट की मांग

रायपुर/दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले की जांच में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने दिल्ली पहुंचकर झीरम नरसंहार वृहद जांच आयोग के अध्यक्ष सतीश कुमार अग्निहोत्री और सदस्य गुलाम मिन्हाजुद्दीन को एक लिखित आवेदन सौंपा है। इस आवेदन में उन्होंने मांग की है कि मामले की तह तक जाने के लिए भाजपा और कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं का नार्को टेस्ट कराया जाए। तिवारी ने इसके लिए आयोग से तत्काल समन जारी करने का आग्रह किया है और आवेदन के साथ कई अहम दस्तावेज व साक्ष्य भी जमा किए हैं। उनका कहना है कि 12 साल बीत जाने के बाद भी छत्तीसगढ़ की जनता इस भयावह हत्याकांड का असली सच जानने का इंतजार कर रही है।

नड्डा से लेकर बघेल तक के नाम शामिल: नार्को टेस्ट की सूची में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता

कांग्रेस प्रवक्ता ने जिन नेताओं के नार्को टेस्ट की मांग की है, उनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव के नाम शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं जैसे भूपेश बघेल और कवासी लखमा के साथ-साथ अमित जोगी और ननकी राम कंवर का नाम भी इस सूची में रखा है। कांग्रेस का आरोप है कि इस हत्याकांड के पीछे एक गहरी राजनीतिक साजिश थी, जिसे तत्कालीन सरकार की सुरक्षा चूक ने और आसान बना दिया। वहीं, भाजपा इसे हमेशा से ही केवल एक नक्सली हमला बताती रही है। इस आवेदन के बाद अब प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की उम्मीद है।

जांच और कानूनी उलझनों का लंबा सफर: 2013 से अब तक फाइलों में दबा है सच

25 मई 2013 को सुकमा में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान झीरम घाटी में हुआ यह हमला देश के सबसे बड़े राजनीतिक हत्याकांडों में से एक था। तब से लेकर अब तक यह मामला एनआईए, सीबीआई, न्यायिक आयोग और एसआईटी के बीच झूलता रहा है। 2013 में एनआईए ने जांच शुरू की और चार्जशीट भी दाखिल की, लेकिन उसकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं हो पाई। 2018 में कांग्रेस सरकार आने पर एसआईटी बनी, लेकिन केंद्र और राज्य के बीच कानूनी खींचतान के चलते जांच आगे नहीं बढ़ सकी। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस को जांच का रास्ता तो दिया, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब फिर से जांच की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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