New Excise Policy: छत्तीसगढ़ में शराब की कांच वाली बोतलें बंद: अब प्लास्टिक में मिलेगी शराब, साय कैबिनेट ने नई आबकारी नीति पर लगाई मुहर

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की नई आबकारी नीति (2026-27) को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत एक बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब राज्य में शराब कांच की बोतलों के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। सरकार का तर्क है कि कांच की बोतलों के टूटने से हर साल करोड़ों का वित्तीय नुकसान होता है और इससे दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को भी खतरा रहता है। इस नई व्यवस्था को अगले वित्तीय वर्ष से पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

परिवहन में आसानी और सुरक्षा कारणों से लिया फैसला

आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि प्लास्टिक की बोतलें वजन में हल्की होती हैं, जिससे शराब के परिवहन (ट्रांसपोर्ट) और भंडारण में काफी सुविधा होगी। कांच की बोतलों की तुलना में प्लास्टिक की बोतलों को लाने-ले जाने में कम लागत आएगी और सप्लाई चेन अधिक लचीली बनेगी। इसके अलावा, सुरक्षा के लिहाज से भी इसे बेहतर माना जा रहा है। अक्सर झगड़े या सार्वजनिक विवादों में कांच की बोतलों का इस्तेमाल घातक हथियार के रूप में किया जाता है, प्लास्टिक की बोतलों के आने से इस तरह के खतरों में कमी आने की उम्मीद है।

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नई दुकान नहीं खुलेगी, पुरानी व्यवस्था में होगा सुधार

OFFICIAL: आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट ने केवल विभाग के नियमों और नई पैकेजिंग नीति का अनुमोदन किया है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार का फिलहाल नई शराब दुकानें खोलने का कोई इरादा नहीं है। विभाग का पूरा ध्यान मौजूदा वितरण प्रणाली को सुधारने और बोतलों की टूट-फूट से होने वाले राजस्व नुकसान को रोकने पर है। यह फैसला शुद्ध रूप से प्रशासनिक सुधार और लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

प्लास्टिक बोतल: फायदे और नुकसान का गणित

नई नीति को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। जहां एक तरफ यह सरकारी खजाने के लिए फायदेमंद दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। प्लास्टिक की बोतलों के आने से पैकेजिंग की लागत तो कम होगी, लेकिन पर्यावरण पर इसके कचरे का भार बढ़ेगा। नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझिए कि यह बदलाव आम जनता और सरकार के लिए कैसा रहेगा:

पक्षमुख्य फायदेमुख्य नुकसान / चुनौतियां
सुरक्षा और सुविधाटूटने का डर नहीं, ले जाने में हल्का, हथियार के रूप में इस्तेमाल संभव नहीं।प्लास्टिक ज्वलनशील होता है, आग लगने पर खतरा अधिक।
प्रशासन/राजस्वट्रांसपोर्ट खर्च में कमी, स्टोरेज प्रबंधन आसान, राजस्व हानि में गिरावट।नकली शराब बनाने वालों के लिए प्लास्टिक की नकल करना आसान।
उपभोक्ता/सेहतचोट लगने का जोखिम खत्म, दुकानों पर संभालना आसान।लंबे समय तक स्टोर करने पर शराब के स्वाद और गुणवत्ता पर असर।
पर्यावरणपरिवहन के दौरान कार्बन उत्सर्जन में मामूली कमी।प्लास्टिक कचरे और माइक्रोप्लास्टिक की गंभीर समस्या।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर उठ रहे गंभीर सवाल

सरकार के इस फैसले का पर्यावरणविदों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। जानकारों का कहना है कि प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से कचरा प्रबंधन की चुनौतियां और जटिल हो जाएंगी। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता है कि अल्कोहल एक सक्रिय तरल पदार्थ है जो कुछ प्रकार के प्लास्टिक (जैसे BPA) के साथ क्रिया कर सकता है, जिससे हानिकारक रसायन शराब में घुल सकते हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि इन दुष्प्रभावों को रोकने के लिए सख्त मानक और बेहतर रीसाइक्लिंग व्यवस्था तैयार की जाएगी।

ब्रांड वैल्यू और नकली शराब का खतरा

प्रीमियम और मध्यम श्रेणी की शराब पीने वाले उपभोक्ताओं के बीच प्लास्टिक की बोतलें ब्रांड की छवि को नुकसान पहुँचा सकती हैं। अक्सर लोग प्लास्टिक में आने वाले उत्पादों को निम्न स्तर का मानते हैं। इसके अलावा, प्लास्टिक की बोतलों की डिजाइन को कॉपी करना आसान होता है, जिससे राज्य में अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार के फलने-फूलने का डर है। अब यह देखना होगा कि आबकारी विभाग इन चुनौतियों से निपटने के लिए किस तरह की सुरक्षा सील और कोड का उपयोग करता है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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