
छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त नियम लागू किया है। अब फील्ड विजिट के नाम पर मुख्यालय से गायब रहने वाले अफसरों की मनमानी नहीं चलेगी। शासन के संज्ञान में आया था कि कई अधिकारी फील्ड निरीक्षण का बहाना बनाकर कार्यालयीन कार्यों और जनसुनवाई से बचते रहे हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने कार्य दिवसों का नया शेड्यूल तय कर दिया है।
सोमवार से बुधवार दफ्तर रहना अनिवार्य
नए नियम के मुताबिक, राज्य के सभी राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों को सोमवार, मंगलवार और बुधवार को अनिवार्य रूप से अपने कार्यालय में मौजूद रहना होगा। इन तीन दिनों में अधिकारियों को फाइलों का निपटारा, विभागीय समीक्षा और आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देनी होगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि इन महत्वपूर्ण दिनों में बिना किसी ठोस कारण के मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे दफ्तर के काम समय पर पूरे हो सकें।
गुरुवार और शुक्रवार को होगा फील्ड विजिट
अधिकारियों के निरीक्षण और बाहरी कार्यों के लिए अब केवल गुरुवार और शुक्रवार का दिन तय किया गया है। अब कोई भी अफसर अपनी मर्जी से किसी भी दिन फील्ड पर जाने का बहाना नहीं बना सकेगा। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रीय दौरों और कार्यक्रमों की योजना इसी समय-सारणी के अनुसार बनाएं। इस व्यवस्था से विभागीय समन्वय बेहतर होगा और जनता को यह पता रहेगा कि उन्हें अधिकारी दफ्तर में कब मिलेंगे।

जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान
शासन का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नागरिक केंद्रित बनाना है। जब अधिकारी सप्ताह के शुरुआती तीन दिनों में दफ्तर में मौजूद रहेंगे, तो दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों और फरियादियों को खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा। इससे न केवल जनसुनवाई की व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि विभागों के बीच होने वाला आपसी तालमेल भी पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो जाएगा।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत ने सभी विभागाध्यक्षों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने को कहा है। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी तय दिनों के अलावा बिना पूर्व अनुमति के दफ्तर से नदारद पाया जाता है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
कार्य संस्कृति में सुधार की नई उम्मीद
सरकार के इस कदम से राज्य की प्रशासनिक कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। तय शेड्यूल होने से फाइलें टेबल पर नहीं रुकेंगी और निर्णय प्रक्रिया में तेजी आएगी। नियमित उपस्थिति से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी आसान होगी। यह नया नियम न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि सरकारी दफ्तरों के प्रति जनता के भरोसे को भी मजबूती प्रदान करेगा।



