छत्तीसगढ़ में अब शिक्षकों से नहीं कराए जाएंगे गैर-शिक्षकीय कार्य, सिर्फ चुनावी ड्यूटी रहेगी अनिवार्य

छत्तीसगढ़ सरकार स्कूल शिक्षकों को लंबे समय से लग रहे अतिरिक्त कामों से छुटकारा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रस्तावित आदेश के तहत धान खरीदी, पशु गणना, सर्वेक्षण और अन्य फील्ड ड्यूटी जैसे कार्य अब शिक्षकों से नहीं कराए जाएंगे। केवल चुनावी कार्य अनिवार्य रहेंगे। शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है और आदेश जल्द जारी होने की उम्मीद है।

कई वर्षों से स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ रहा था असर

जिला प्रशासन की मांग पर शिक्षकों को लगातार ऐसे कार्यों में लगाया जा रहा था जिनका पढ़ाई से कोई संबंध नहीं है। कहीं शिक्षक पशुओं की गणना करते दिखे, तो कई जिलों में उन्हें धान मंडियों में तैनात कर दिया गया। कवर्धा में तो शिक्षकों को खेतों की गूगल मैप फोटो भेजने की ड्यूटी तक दी गई। इन सबके चलते कक्षाओं में पढ़ाई का समय घट रहा था और इसका असर सीधे बच्चों की सीखने की क्षमता पर पड़ रहा था।

शिक्षा मंत्री ने साफ किया था रुख

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी पढ़ाना है और उन्हें अन्य विभागों के फील्ड कार्यों में लगाना उचित नहीं है। इसी आधार पर विभाग ने तय किया है कि केवल चुनाव और निर्वाचन से जुड़ी जिम्मेदारियां ही जारी रहेंगी। बाकी सारे गैर शिक्षकीय कार्यों से शिक्षकों को मुक्त किया जाएगा।

किन कामों से मिलेगी पूरी तरह राहत

अब शिक्षकों को उन सभी कार्यों से अलग किया जाएगा जिनमें पिछले वर्षों से उन्हें लगाया जा रहा था। इसमें रोजगार गारंटी योजना की ड्यूटी, खेतों की फोटो भेजने का काम, पौधारोपण की तस्वीरें भेजना, कुत्तों की गणना, ओबीसी सर्वेक्षण, राशन कार्ड फॉर्म भरना, तेंदूपत्ता खरीदी, शौचालय की गिनती, पशु गणना, धान मंडी ड्यूटी, आयुष्मान कार्ड फॉर्म, किताबों की स्कैनिंग, समस्या निवारण शिविर, महतारी वंदन योजना ड्यूटी, मतदाता जागरुकता अभियान, ग्राम सभा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी ड्यूटी शामिल हैं। इन सभी जिम्मेदारियों से शिक्षकों को पूरी तरह मुक्त किया जाएगा।

बिना सूचना दिए ड्यूटी लगाने की शिकायतें भी खत्म होंगी

कई जिलों में प्रशासन बिना शिक्षा विभाग को जानकारी दिए ही शिक्षकों को फील्ड कार्यों में तैनात कर देता था। बाद में विभाग को पता चलता था कि शिक्षक स्कूल के बजाय किसी अन्य कार्य में लगे हुए हैं। नए आदेश के बाद ऐसी स्थिति बनने की संभावना नहीं रहेगी।

पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से स्कूलों में नियमित पढ़ाई मजबूत होगी। चौथी से आठवीं कक्षाओं में सीखने का अंतर बढ़ता जा रहा था, जिसे कम करने में यह निर्णय काफी मदद करेगा। शिक्षक पूरे समय बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे पाएंगे और पाठ्यक्रम पूरा कराने में भी राहत मिलेगी।

शिक्षक संगठनों ने फैसले का स्वागत किया

छत्तीसगढ़ शिक्षक महासंघ और अन्य संगठनों ने इसे महत्वपूर्ण निर्णय बताया है। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित मांग को पूरा किया गया है और इससे बच्चों के भविष्य पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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