
नगरी: छत्तीसगढ़ के नगरी ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत साकरा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ अतिक्रमण के चलते भगवान शिव के नंदी की प्रतिमा का अपमान हुआ है। भक्ति और आस्था के केंद्र को चौपाटी और दुकानों ने घेर लिया था, जिसके बाद प्रशासन की चुप्पी से तंग आकर नंदी स्थापित करने वाले परिवार को ही मूर्ति हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
जूठे बर्तनों की बदबू से घिरे नंदी भगवान
यह घटना ग्राम पंचायत साकरा की है। स्थानीय समाजसेवी स्वर्गीय महेश सिन्हा ने वर्षों पहले भगवान शंकर के प्रति आस्था स्वरूप नंदी भगवान की प्रतिमा स्थापित की थी।
- अपमानजनक स्थिति: जिस जगह भक्ति का माहौल होना चाहिए था, वहाँ अतिक्रमणकारियों ने दुकानें और चौपाटी लगा ली। प्रतिमा पूरी तरह जूठे बर्तनों की बदबू और उपेक्षा के माहौल से घिर गई थी, जो आस्था का सीधा अपमान था।
गुहार लगाने के बाद भी प्रशासन मौन
नंदी स्थापना करने वाले परिवार से आने वाले समाजसेवी हितेश सिन्हा ने इस स्थिति को देखकर कई बार आवाज उठाई।
- प्रशासन से गुहार: हितेश सिन्हा ने ग्राम पंचायत साकरा के सरपंच, सचिव और जिम्मेदार अधिकारियों से अतिक्रमण हटाने के लिए बार-बार गुहार लगाई, लेकिन किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी और न ही कोई कार्रवाई की गई।
- मजबूरी में उठाया कदम: भगवान के सम्मान का अपमान सहन न कर पाने के कारण, हितेश सिन्हा ने अंततः मजबूरी में स्वयं क्रेन मंगवाकर नंदी भगवान की प्रतिमा को अतिक्रमण वाली जगह से हटाकर दूसरी जगह स्थापित करने की पहल की।
यह घटना केवल एक मूर्ति को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन की चुप्पी और धार्मिक आस्था के प्रति उनकी उदासीनता का सबसे बड़ा प्रमाण है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब भगवान की सवारी नंदी ही अतिक्रमण के आगे बेबस हो जाए, तो आम भक्त न्याय की उम्मीद किससे रखेगा।



