
रायपुर: CG Bulldozer Action: रायपुर में सूदखोरी और गुंडागर्दी के खेल का पर्दाफाश हो गया है। फरार हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर और उसके भाई वीरेंद्र तोमर के खिलाफ अब पुलिस और प्रशासन दोनों ही एक्शन मोड में आ चुके हैं। शनिवार को नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने भाटागांव स्थित उनके ऑफिस पर बुलडोजर चला दिया।
History Sheeter RohitTomar: कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल और निगम की टीम मौके पर तैनात रही। बताया जा रहा है कि यह ऑफिस अवैध तरीके से बिना किसी मंजूरी के बनाया गया था और यहीं से तोमर बंधु अपना सूदखोरी का धंधा चला रहे थे।
भावना तोमर के नाम से था दफ्तर, असली मास्टरमाइंड फरार
History Sheete VirendraTomar: पुलिस सूत्रों के अनुसार, रोहित तोमर ने यह ऑफिस अपनी पत्नी भावना तोमर (उर्फ रुचि तोमर) के नाम पर खोला था। इसी जगह से वह और उसका भाई वीरेंद्र तोमर लोगों को ऊँचे ब्याज पर पैसे उधार देते थे।
दोनों भाई लंबे वक्त से फरार हैं और उनके खिलाफ कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुका है।

‘प्रहरी’ टीम भी तैनात, कार्रवाई के दौरान निकाला गया सामान
निगम की टीम ने जब बुलडोजर चलाया, उससे पहले ऑफिस के भीतर रखा सामान बाहर निकाला गया। मौके पर ‘प्रहरी’ नाम की पुलिस की विशेष टीम भी तैनात रही, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
लग्जरी कार जब्त, 3 लाख के बदले वसूले 8 लाख
Raipur Bulldozer Action: इस पूरे मामले में पुलिस को कई चौंकाने वाली जानकारियाँ हाथ लगी हैं। भावना तोमर की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में पता चला कि उन्होंने एक भिलाई निवासी मनोज कुमार वर्मा की जैगुआर कार भी जब्त कर रखी थी।
मनोज ने पांच साल पहले रोहित तोमर से 3 लाख रुपए कर्ज लिया था, जिसके बदले अपनी कार गिरवी रखी थी। उसने अब तक 8 लाख रुपए चुका दिए, लेकिन इसके बावजूद कार वापस नहीं की गई।
वीरेंद्र तोमर की पत्नी ने भी की थी गुंडई, हो चुकी है गिरफ्तार
Crime Raid: वीरेंद्र तोमर की पत्नी शुभ्रा सिंह (उर्फ नेहा) को पहले ही पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक यूट्यूबर और उसके कैमरामैन को बंधक बनाकर मारपीट की थी।
इस केस में दिल्ली की एक महिला और मध्यप्रदेश के एक व्यक्ति को भी पकड़ा गया था। मामला कर्ज वसूली और धमकीबाजी का है।

पुलिस अब तोमर बंधुओं की प्रॉपर्टी की जांच में जुटी है। अवैध संपत्तियों की लिस्ट तैयार की जा रही है और जल्द ही और भी ठिकानों पर कार्रवाई हो सकती है।
सवाल अब यही है – रोहित और वीरेंद्र तोमर आखिर कब पुलिस के हाथ लगेंगे? क्या रायपुर को सूदखोरी के इस जाल से पूरी तरह मुक्ति मिल पाएगी?



