VIDEO: राजिम कुंभ में ‘बालोद जम्बूरी’ जैसा खेल: 7 करोड़ का टेंडर महज 5 दिन में निपटाया, नियमों को ताक पर रखने के पीछे क्या है मंशा?

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक राजिम कुंभ कल्प 2026 विवादों के घेरे में आ गया है। आयोजन की तैयारियों के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये के टेंडर में बड़ी अनियमितता के आरोप लग रहे हैं। दरअसल, सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी बड़े टेंडर की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कम से कम 21 दिन का समय दिया जाना अनिवार्य है। लेकिन राजिम मेले के मामले में प्रशासन ने इस नियम को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। आरोप है कि महज 5 दिनों के भीतर पूरी टेंडर प्रक्रिया को आनन-फानन में निपटा दिया गया, जिससे इसमें भ्रष्टाचार की बू आने लगी है।

टेंडर प्रक्रिया में दिखाई गई गजब की फुर्ती

राजिम कुंभ का आयोजन 1 फरवरी से 15 फरवरी तक होना तय है। इसके लिए 7 जनवरी को टेंडर का विज्ञापन प्रकाशित किया गया। इसके अगले ही दिन यानी 8 जनवरी को प्री-बिड मीटिंग बुलाई गई और 9 जनवरी को ऑनलाइन बोली जमा करने की आखिरी तारीख रख दी गई। 10 जनवरी को टेंडर की खिड़की बंद कर दी गई। इतनी जल्दबाजी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि इतने कम समय में नई एजेंसियों के लिए आवेदन करना और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करना नामुमकिन है। इससे अंदेशा जताया जा रहा है कि टेंडर पहले से तय चहेती एजेंसियों को देने के लिए ही यह ‘शॉर्टकट’ अपनाया गया।

बालोद जम्बूरी कांड की यादें हुई ताजा

यह मामला पिछले दिनों बालोद जिले में हुए जम्बूरी आयोजन की याद दिला रहा है। वहां भी करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई थी क्योंकि टेंडर स्वीकृत होने से पहले ही टेंट और शौचालयों का निर्माण शुरू हो गया था। जब मीडिया में खबर आई, तब विभाग ने हड़बड़ी में टेंडर निकाला था। अब ठीक वही कहानी राजिम मेले में दोहराई जा रही है। राजिम में भी 7 करोड़ रुपये के टेंडर में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

विपक्ष ने सरकार और अफसरों को घेरा

आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी की प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ का कहना है कि बिना टेंडर के अपने करीबियों को काम बांटना भ्रष्टाचार का साफ संकेत है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि गरियाबंद कलेक्टर और संस्कृति विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इस पूरी धांधली को अंजाम दिया गया है। आप नेताओं का कहना है कि जब प्रक्रिया ही पारदर्शी नहीं है, तो काम की गुणवत्ता पर भरोसा कैसे किया जा सकता है। यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग है।

‘पुनीत कार्य’ पर कमीशनखोरी का आरोप

आम आदमी पार्टी के युवा विंग के अध्यक्ष इमरान खान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजिम कुंभ जैसे पावन आयोजन में भी सत्ता पक्ष कमीशनखोरी का रास्ता ढूंढ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार भक्ति के इस पर्व को भी भ्रष्टाचार का केंद्र बना रही है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर प्रशासन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा। मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में गरियाबंद में इस कथित घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन करने की योजना है।

जांच के दायरे में आएंगे जिम्मेदार अधिकारी?

इस पूरे विवाद के बाद अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। नियमों के उल्लंघन की बात सामने आने के बाद क्या इन टेंडरों को रद्द किया जाएगा या जांच बैठाई जाएगी, यह बड़ा सवाल है। आमतौर पर 21 दिन की मियाद इसलिए रखी जाती है ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो और सरकार को सबसे कम दाम में बेहतरीन काम मिल सके। लेकिन राजिम में अपनाई गई प्रक्रिया ने पूरी व्यवस्था को संदेह के घेरे में ला दिया है। फिलहाल, इस मामले ने मेले की शुरुआत से पहले ही सरकार की किरकिरी करा दी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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