
रायपुर। नई दिल्ली में 26 जनवरी को आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के लिए छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन हो गया है। इस साल रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने राज्य की उस झांकी को अंतिम मंजूरी दी है, जो जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले ‘डिजिटल संग्रहालय’ पर आधारित है। नवा रायपुर में स्थित इस आधुनिक संग्रहालय की झलक अब कर्तव्य पथ पर देशभर के लोगों के सामने होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह झांकी आदिवासी समाज की देशभक्ति और उनके बलिदान की अनसुनी कहानियों को वैश्विक मंच प्रदान करेगी। यह प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय शौर्य के लिए एक ऐतिहासिक पल है।
कठिन चयन प्रक्रिया के बाद मिली जगह: 17 राज्यों की सूची में छत्तीसगढ़ ने बनाई राह
गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होना किसी भी राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। जनसंपर्क विभाग के सचिव रोहित यादव के अनुसार, झांकी के चयन की प्रक्रिया करीब चार महीने तक चली। रक्षा मंत्रालय ने देशभर के सभी राज्यों से प्रस्ताव मांगे थे, जिसमें विषयवस्तु, डिजाइन और तकनीकी बारीकियों के आधार पर गहन छंटनी की गई। पांच अलग-अलग चरणों की कठिन स्क्रीनिंग और थ्रीडी मॉडल के परीक्षण के बाद विशेषज्ञ समिति ने केवल 17 राज्यों की झांकियों को अंतिम सूची में जगह दी है। छत्तीसगढ़ की संकल्पना और इसके आधुनिक स्वरूप की समिति ने विशेष तौर पर सराहना की है, जिसके चलते इसे परेड का हिस्सा बनने का गौरव मिला।
वंदे मातरम् थीम पर आधारित झांकी: आधुनिक तकनीक और इतिहास का अनोखा संगम
जनसंपर्क आयुक्त डॉ. रवि मित्तल ने बताया कि इस वर्ष झांकी का निर्माण भारत सरकार की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ को ध्यान में रखकर किया गया है। झांकी में उन आदिवासी जननायक विद्रोहों और बलिदानों को जीवंत किया गया है, जिन्हें इतिहास के पन्नों में अक्सर कम जगह मिली। झांकी का मुख्य आकर्षण नवा रायपुर का वह डिजिटल संग्रहालय है, जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य स्थापना की रजत जयंती पर किया था। यह झांकी दिखाएगी कि कैसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से हम अपनी नई पीढ़ी को पूर्वजों के संघर्ष और गौरवशाली गाथाओं से जोड़ रहे हैं।
बलिदान की परंपरा का प्रदर्शन: झांकी के संगीत और थ्रीडी मॉडल पर हुआ काम
झांकी को अंतिम रूप देने के लिए संगीत और कला के तालमेल पर विशेष ध्यान दिया गया है। रक्षा मंत्रालय की समिति ने झांकी के साथ बजने वाले संगीत और इसके पीछे की संकल्पना का बारीकी से परीक्षण किया। यह झांकी न केवल एक कलाकृति होगी, बल्कि एक संदेश भी देगी कि छत्तीसगढ़ के जंगलों से शुरू हुए विद्रोहों ने भारत की आजादी की नींव को कैसे मजबूत किया था। परेड के दौरान जब यह झांकी कर्तव्य पथ से गुजरेगी, तो इसमें छत्तीसगढ़ के पारंपरिक वाद्यों की धुन और जनजातीय कलाकृतियों का भी समावेश होगा, जो इसे अन्य राज्यों से अलग और विशिष्ट बनाएगा।



