
महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी स्कूल की एक परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कक्षा चौथी की अंग्रेजी विषय की अर्धवार्षिक परीक्षा में पूछे गए एक सवाल ने धार्मिक संगठनों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। दरअसल, प्रश्नपत्र में एक सवाल पूछा गया था कि ‘सोनू के कुत्ते का क्या नाम है?’ (What is the name of Sonu’s dog?)। इस वस्तुनिष्ठ प्रश्न के लिए दिए गए विकल्पों में से एक विकल्प के रूप में ‘राम’ नाम लिखा गया था। जैसे ही यह बात पालकों और हिंदू संगठनों तक पहुंची, विरोध के स्वर तेज हो गए। लोगों का कहना है कि करोड़ों की आस्था के केंद्र भगवान राम के नाम का उपयोग इस तरह के संदर्भ में करना घोर अपमानजनक है।
शिक्षा विभाग के खिलाफ फूटा आक्रोश: डीईओ दफ्तर के बाहर प्रदर्शन और पुतला दहन, जिम्मेदार अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग
इस मामले ने तूल पकड़ते ही विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने विभाग की लापरवाही और असंवेदनशीलता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और डीईओ का पुतला दहन किया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने प्रश्नपत्र तैयार करते समय मर्यादा का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा। संगठन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर विनय लंगेह और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर इस गलती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है।

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप: विहिप ने कहा- बच्चों के मन में गलत धारणा पैदा कर रहा है सिलेबस, सात दिन का अल्टीमेटम
विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय नेताओं का कहना है कि छोटी कक्षा के बच्चों की परीक्षा में इस तरह के विकल्प देना न केवल अनुचित है, बल्कि समाज की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने की कोशिश है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले सात दिनों के भीतर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन किया जाएगा। हिंदू संगठनों का तर्क है कि इस तरह के प्रश्नों से बच्चों के कोमल मन पर गलत प्रभाव पड़ता है और वे अपनी संस्कृति व आराध्य के प्रति भ्रमित हो सकते हैं। इस घटना के बाद से महासमुंद से लेकर रायपुर तक प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है।
शिक्षा विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल: कार्रवाई के इंतजार में आक्रोशित लोग, अब तक नहीं आया कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण
पूरे विवाद के बीच अब तक जिला शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विभाग की इस चुप्पी ने प्रदर्शनकारियों के गुस्से को और अधिक भड़का दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर प्रश्नपत्र के फाइनल ड्राफ्ट की जांच (Moderation) किस स्तर पर की गई थी और ऐसी गंभीर चूक नजरअंदाज कैसे हो गई। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। अब सबकी नजरें कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वे इस मामले में शामिल परीक्षा समिति और पेपर सेट करने वाले विशेषज्ञों पर क्या एक्शन लेते हैं।



