
बस्तर संभाग के जगदलपुर के पास स्थित बिलोरी गांव से महिला सशक्तिकरण की एक शानदार मिसाल सामने आई है। यहां की सरपंच उमन बघेल ने समाज की पुरानी सोच को बदलने के लिए एक अनोखी मुहिम शुरू की है। वे गांव में पैदा होने वाली हर नवजात बेटी के परिवार को अपने निजी फंड से 2100 रुपये की सम्मान राशि भेंट कर रही हैं। सबसे खास बात यह है कि इस नेक काम के लिए वे किसी सरकारी मदद का इंतजार नहीं करतीं, बल्कि अपनी सूझबूझ से बेटियों के आगमन को यादगार बना रही हैं।
बोझ नहीं अब ताकत बनीं बेटियां
सरपंच की इस पहल का असर अब पूरे बिलोरी गांव में दिखने लगा है। जिस समाज में कभी बेटी के जन्म पर चुप्पी साध ली जाती थी, वहां अब खुशियां मनाई जाती हैं। इस योजना का मकसद केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि लोगों के मन से यह डर निकालना है कि बेटियां बोझ होती हैं। परिवारों को दी जाने वाली यह छोटी सी प्रोत्साहन राशि समाज में यह संदेश फैला रही है कि बेटियां घर की ताकत और लक्ष्मी हैं। इस बदलाव ने गांव के सामाजिक ढांचे में सकारात्मक हलचल पैदा कर दी है।
कागजी जागरूकता में भी आया सुधार
इस सम्मान राशि के साथ सरपंच ने एक स्मार्ट शर्त भी जुड़ी है, जो प्रशासनिक नजरिए से काफी अहम है। लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलता है जो समय पर बेटी का जन्म पंजीकरण और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करते हैं। इससे गांव के लोग अब दस्तावेजों और सरकारी प्रक्रियाओं के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। उमन बघेल की इस दूरदर्शी सोच ने न केवल बेटियों के प्रति सम्मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे गांव को जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।
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