
Nun Arrest Case: दुर्ग रेलवे स्टेशन पर 25 जुलाई 2025 को हुए हंगामे और नन की गिरफ्तारी के मामले में अब भी सियासत जारी है। तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस विवाद का पटाक्षेप नहीं हुआ है। आदिवासी युवतियों से हुई कथित छेड़छाड़ और नन की गिरफ्तारी के विरोध में सीपीआई (CPI) के कार्यकर्ता एक बार फिर लामबंद हो गए हैं। इसी क्रम में, नारायणपुर में सीपीआई ने पांच दिवसीय क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिसमें सैंकड़ों लोग शामिल हुए हैं।

CPI सांसद ने लगाया न्याय न मिलने का आरोप
केरल से CPI सांसद संतोष कुमार ने आंदोलन को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ शासन की जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग सिर्फ एफआईआर दर्ज करना नहीं, बल्कि न्याय मिलना है। सांसद ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी युवतियों से कथित छेड़छाड़ और हंगामे के इस मामले में अब तक कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने कहा कि जब व्यवस्था सुनवाई नहीं करती, तब जनता को सड़क पर उतरना पड़ता है।
युवतियों ने लगाए थे बजरंग दल पर गंभीर आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप थे, जिन्हें तीनों आदिवासी युवतियों ने पूरी तरह झुठला दिया था। युवतियों ने बताया था कि वे स्वेच्छा से ननों के साथ जा रही थीं, लेकिन हिंदूवादी संगठन से जुड़े लोगों ने जबरन उनको रोका और उनके साथ छेड़छाड़ की गई। युवतियों ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और ज्योति शर्मा नाम की एक युवती के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। सीपीआई सांसद ने कहा कि युवतियों के बयान सामने आने के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई से पल्ला झाड़ लिया है।

पुलिस कार्रवाई न होने पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
सीपीआई सांसद संतोष कुमार ने पुलिस प्रशासन पर इस मामले में कोई कार्रवाई करने से बचने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं और जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। सीपीआई के राजकीय सचिव के. साजी ने भी कहा कि बस्तर अंचल में महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं, और यह मामला भाजपा सरकार द्वारा अपराधियों को संरक्षण देने का उदाहरण है।
कांग्रेस सांसदों ने ननों को झूठे आरोपों में फंसाने का दावा किया था
इस पूरे घटनाक्रम में 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के आरोपों के बाद जीआरपी ने ननों को गिरफ्तार कर लिया था। ननों की गिरफ्तारी के बाद 29 जुलाई को कांग्रेस सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल दुर्ग जेल पहुंचा और जेल में बंद ननों से मुलाकात की थी। सांसदों ने मुलाकात के बाद दावा किया था कि ननों को झूठे आरोपों में फंसाया गया है। आखिरकार, 2 अगस्त 2025 को दोनों कैथोलिक ननों को NIA कोर्ट से जमानत मिली थी, जिसके बाद वे 9 दिन बाद दुर्ग सेंट्रल जेल से रिहा हुईं।



